- शुगर केन एंड साइंस टेक्नोलॉजी कॉलेेज इसी सत्र में होना था शुरू
- शासन से पदों की स्वीकृति न होने के कारण अटक गया मामला
मोहित कुमार
मोदीपुरम (मेरठ)। नार्थ इंडिया का पहला कॉलेज ऑफ शुगर केन साइंस एंड टेक्नलॉजी सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में इसी सत्र जुलाई में शुरू होना था। इसके लिए विवि प्रशासन ने कॉलेज ऑफ बेसिक साइंस का चयन किया गया था। शासन से पदों की स्वीकृति न होने के कारण मामला अधर में लटक गया है।
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वर्तमान में कॉलेज ऑफ बायोटेक, कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर और कॉलेज ऑफ वेेटेनरी चल रहे है। कॉलेज ऑफ बेसिक साइंस की बिल्डिंग में कॉलेज ऑफ शुगर केन साइंस एंड टेक्नोलॉजी को चलाने के लिए विवि प्रशासन ने प्रस्ताव पास किया था। यही प्रस्ताव शासन को भेजते हुए पदों की भी स्वीकृति मांगी गई थी दिसंबर में तो मौखिक अनुमति मिल गई थी, लेकिन लिखित में कोई आदेश अभी तक विवि में नहीं पहुंचा। इस कारण से इसके संचालन का मामला अटक गया है। वेस्ट यूपी गन्ना बेल्ट है और यहां के लिए यह कॉलेज और भी अच्छा होगा। इस कॉलेज में पांच डिपार्टमेंट चलने थे और बीटेक की डिग्री शुगर केन एंड टेक्नोलॉजी दी जाएगी। इस कॉलेज के शुरू होने से जहां गन्ने पर अच्छा काम होगा, वहीं छात्रों के लिए रोजगार के साधन भी खुलने की संभावना थी।
पूरी कर ली थी तैयारी
विवि प्रशासन ने जुलाई से नए सत्र में इस कॉलेज को चलाने के लिए तैयारी कर ली थी। शासन की स्वीकृति मिलने के बाद इसी सत्र से इसे चालू किया जाना था। प्रथम वर्ष के लिए बीटेक की डिग्री दी जाएगी। इसमें पांच डिपार्टमेंट चलेंगे, जबकि एमटेक की डिग्री शुगर टेक्नोलॉजी और एल्कोहल टेक्नोलॉजी में दी जाएगी। इसे दूसरे सत्र में सुचारु किया जाएगा। अनुमति न मिलने पर विवि प्रशासन को झटका लगा है।
ये बनने थे डिपार्टमेंट
डिपार्टमेंट ऑफ शुगर केन एंड प्रोडक्शन, डिपार्टमेंट ऑफ केमेस्ट्री एंड बायोटेक्नोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ शुगर टेक्नालॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ शुगर इंजीनियरिंग, डिपार्टमेंट ऑफ बेसिक साइस।
इन पदों की है जरूरत
टीचिंग 3 प्रोफेसर, 6 एसोसिएट प्रोफेसर, 18 असिस्टेंट प्रोफेसर, नॉन टीचिंग के 27 पद।
इस कॉलेज के खुलने से ये होगा लाभ
- वेस्ट यपूी बड़ी गन्ना बेल्ट है वैल्यू एडिशन का काम होगा।
- गन्ना विभाग मेें डिप्लोमा मास्टर की भर्ती से लाभ मिलेगा।
- गन्ने की उन्नत प्रजातियों पर रिसर्च हो सकेगा।
- गन्ने में आनी वाली समस्या पर छात्र और वैज्ञानिक काम करेंगे।
- पढ़ाई के साथ साथ रोजगार की भी जानकारी दी जाएगी।
- नई-नई प्रजातियों का भी विकास किया जाएगा।
कर रहें हैं प्रयास
कॉलेज ऑफ शुगर केन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। इसे सैद्धांतिक सहमति मिल गई थी, लेकिन अभी तक शासन ने कई पदों की स्वीकृति नहीं दी है। विवि प्रशासन की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यदि यह सहमति मिल जाती तो इसी सत्र में इसे शुरू कर दिया जाता। -डॉ. गया प्रसाद, कुलपति कृषि विवि
शासन को भेजी जानकारी
नार्थ इंडिया का यह पहला कॉलेज है, वेस्ट यूपी गन्ना बेल्ट है, इसलिए इसे विवि में खोलने के लिए कहा गया है। शासन ने जो जानकारी मांगी थी, वह फिर से भेजी गई है। अनुमति न मिलने के कारण एकेडमिक काउंसिल की बैठक में भी इसे स्वीकृति नहीं दी गई। यदि काउंसिलिंग से पहले अनुमति मिल जाती है तो फिर एडमिशन लिए जाएंगे। -डॉ. अशोक कुमार अहलुवालिया, रजिस्ट्रार कृषि विवि