37 किलो वजन हुआ कम, शरीर में भी आया दम
- मेडिकल कॉलेज में एक साल में छह मरीजों की बेरियाट्रिक सर्जरी हो चुकी है सफल
- प्राचार्य, सर्जरी कराने वालों और सर्जरी टीम ने साझा की सफलता
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में पिछले साल शुरू हुई बेरिएट्रिक सर्जरी में अब तक छह लोगों के सफल ऑपरेशन हो चुकेहैं। इन लोगों का 16 से लेकर 37 किलो तक वजन कम हो चुुका है। सर्जरी कराने वालों, सर्जरी करने वाली टीम और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बृहस्पतिवार को मीडिया के सामने अब तक के अनुभव शेयर किए।
सर्जरी कराने वाली अनीता गोस्वामी निवासी जागृति विहार ने बताया कि सर्जरी से पहले उनका वजन 130 किलो था, अब 93 किलो है। पहले चलते हुए सांस फूल जाती थी, कई तरह की परेशानियां थीं, अब बहुत अच्छा महसूस होता है। शरीर में पहले ज्यादा ताकत आ गई है। ऐसा ही कहना है मुजफ्फरनगर की बेबी और राजीव कुमार का। बेबी का 116 किलो वजन था जो अब 100 किलो हो गया है। राजीव का 130 किलो वजन था अब 94 किलो है। इन्हें उच्च रक्तचाप, शुगर, थायराइड की समस्या थी। सतेंद्र कुमार निवासी मुजफ्फरनगर की अभी सर्जरी होनी है। वह अभी डाइट प्लान फॉलो कर रहे हैं, इनका सात किलो वजन कम हो चुका है। अब इनकी सर्जरी होनी है। इस दौरान डॉ. विपिन धामा, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. अनिल और डॉ. बिजेंद्र आदि मौजूद रहे।
यह है बेरिएट्रिक सर्जरी
सर्जरी करने वाले सीएमएस डॉ. धीरज राज बालियान ने बताया कि मोटापा कम करने की दूरबीन विधि द्वारा सर्जरी बेरिएट्रिक सर्जरी है। इसमें करीब 80 प्रतिशत आमाशय सर्जरी कर निकाल दिया जाता है। इससे भूख कम लगती है। व्यक्ति उतना ही खाता है, जितनी उसके शरीर को जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि निजी चिकित्सालयों में बेरिएट्रिक सर्जरी का खर्च ढाई से पांच लाख तक आता है, जबकि मेडिकल कॉलेज में अधिकांश चीजें निशुल्क होने केकारण यहां 40 से 50 हजार रुपये में हो जाती है।
अधिक बीएमआई वालों की होती है सर्जरी
मोटापा नापने का पैमाना बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) होता है। जो सामान्यत: 18.5 से 24.9 तक होता है। बेरिएट्रिक सर्जरी उन मरीजों में की जाती है, जिनकी बीएमआई 35 से ऊपर तथा अन्य बीमारियां जैसे डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हाई कोलेस्ट्रॉल आदि हो। ऑपरेशन के दो तीन दिन बाद मरीज की छुट्टी कर दी जाती है।