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भगवान महावीर का अहिंसा का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ

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भगवान महावीर का अहिंसा का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ
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श्री शांतिनाथ विधान में मुनि भावभूषण महाराज ने मंगल प्रवचन किए
अमर उजाला ब्यूरो
हस्तिनापुर। श्री दिगम्बर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान में आज मुनि भावभूषण महाराज ने मंगल प्रवचनों में कहा कि आज हिंसा का चारों ओर आतंक है। जहां देखो वहां हिंसा का ही बोलबाला नजर आता है। ऐसी हिंसा को शांत करने के लिए भगवान महावीर का बताया मार्ग सबसे उचित है।
आज शांतिधारा करने का सौभाग्य सुरेंद्र कुमार, नुपुर जैन, जेके जैन, शीला जैन को प्राप्त हुआ। मुनि भावभूषण जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि आज हिंसा का चारों ओर आतंक है। जहां देखो वहां हिंसा ही नजर आती है। ऐसी हिंसा को शांत करने के लिए भगवान महावीर का बताया हुआ मार्ग, अहिंसा ही सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। मानव मन में यदि अहिंसा कोमल कमनीय भावना न होती तो क्या स्थिति होती। मानव ने परिवार, समाज एवं राष्ट्र का निर्माण किया। अंतर्राष्ट्रीय संबंध स्थापित किए। इन सबका मूल आधार, अहिंसा और शांति ही है। जियो और जीने दो, वसुधैव कुटुम्बकम, परस्परोपग्रहो जीवानाम, अहिंसा परमो धर्म: विश्व शांति स्थापना की बुनियाद है। आतंकवाद एवं परमाणु युद्धों के लिए अहिंसा एक शस्त्र है। अहिंसा में ही मानव का, प्रकृति का, पूरे विश्व का कल्याण निहित है। अहिंसा अमृत का अक्षय कोष है और हिंसा गरल का भंडार है। अहिंसा में प्रेम, करुणा, दया, वात्सल्य, प्रमोदता, मैत्री आदि गुणसमाहित है। जिसके द्वारा हम सब पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। इस कारण से ही अहिंसा से विश्व शांति संभव है। इस विधान में 30वें दिन 114 परिवारों की ओर से विधान किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र महामंत्री मुकेश जैन सर्राफ, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, जीवेन्द्र जैन, राजेन्द्र जैन मवाना, राजीव जैन, जितेन्द्र कुमार, प्रमोद जैन, विजय कुमार, मुकेश कुमार, अशोक जैन, उमेश जैन, अतुल, मणिचंद, कमल आदि का सहयोग रहा।
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गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर पुण्य कमाया
हस्तिनापुर/परीक्षितगढ़/सरधना। ज्येष्ठ गंगा दशहरा पर बुधवार को मखदूमपुर, भीकुंड गांव की पूर्व दिशा में गंगा पुल एवं बधुवा गांव के समीप आसपास के कई जनपदों के गांवों एवं शह/सरों से आए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। गंगा किनारे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
गंगा पर पहुंचे पुजारी गोपाल शर्मा ने बताया कि गंगा नदी पर प्राचीन समय में भागीरथ के पूर्वजों ने तपस्या की थी। इस पर गंगा दशहरा दशमी के दिन पृथ्वी आई थी और भगवान शंकर की जटाओ से दो मुख से निकली थी। इसी धार्मिकता को ध्यान में रखते हुए आज के दिन गंगा के कई स्थानों पर मेला लगाकर पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं, गंगा में स्नान कर बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ अर्जित करते हैं। ज्येष्ठ दशहरा के अवसर पर आज के दिन गंगा धरती पर अवतरित होकर शिव की जटाओं से अवमुक्त हुई थी। इसके बाद गंगा रथों पर चलती रही थी। इस समय गंगा नदी पर लगने वाले मेलों मे गंगा की पूजा-अर्चना और गंगा स्नान कर धर्मलाभ अर्जित करने दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु कई स्थानों से गंगा पर पहुंचकर धर्मलाभ अर्जित करते हैं। आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भीकुंड, बैराज, मखदूमपुर गंगा घाट पहुंचकर पूजा-अर्चना की और स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था के चलते पुलिस बल तैनात रहा।
परीक्षितगढ़ खादर क्षेत्र के ग्राम खरखाली गांधी गगा घाट पर जेष्ठ दशहरा मेले में दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने गंगा में डूबकी लगाकर धर्मलाभ कमाया और श्रद्धालुओं ने बच्चों का मुंडन कराया। ज्येष्ठ माह दशमी में खरखाली गंगा घाट पर सुबह से आसपास के श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गंगा में स्नान किया और प्रसाद चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। वहीं, बच्चों ने मेले में खरीदारी की। सुबह से शाम तक मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही और हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई।
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सरधना में गंगा दशहरा के मौके पर जगह-जगह हवन यज्ञ के साथ भंडारे का आयोजन किया गया। साथ ही शिविर लगाकर राहगीरों को शर्बत पिलाया गया। सरधना गंगनहर पुल पर मेहरमती मीणा गांव निवासी रामकुमार, मनोज कुमार, दिनेश मीणा, अरुण कुमार, ओमवीर, सुरेश आदि ने शिविर लगाकर भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को रोककर उन्हें शर्बत पिलाया। उधर, मेहरमती मीणा गांव के जंगल स्थित हनुमान मंदिर पर गंगा दशहरे के मौके पर हवन यज्ञ के साथ भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर मंदिर के पुजारी हरि सिंह, मनोज, सुरेश, सोनू, बिद्दी उर्फ वेदप्रकाश, संतराम, पवन गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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