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सर्वे में चूक से गुलावठी फ्लाईओवर का काम रुका

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सर्वे में चूक से गुलावठी फ्लाईओवर का काम रुका
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खरखौदा। मेरठ से बुलंदशहर तक बनाए जा रहे राजमार्ग 235 का निर्माण तेज रफ्तार से चल रहा था। जिसके चलते मेरठ से हापुड़ तक करीब 90 फीसदी पूरा हो गया है। वहीं, हापुड़ से बुलंदशहर तक करीब 34 किलोमीटर पर 60 फीसदी काम हो सका है। यहां सबसे बड़ी समस्या गुलावठी में सात किलामीटर लंबे बाईपास के निर्माण में आ रही है। यहां एनएचएआई ने जमीन के सर्वे के दौरान चूक की वजह से कम जमीन का अधिग्रहण किया था। अब यहां अधिक जमीन की आवश्यकता पड़ रही है। इसके चलते किसान नए सिरे से गजट निकालकर तथा 2019 के सर्किल रेट का चार गुना लेने की मांग पर अड़े हुए हैं। जिस कारण बाईपास निर्माण रुका है। जिससे कार्य समय सीमा में पूर्ण होने के आसार नहीं हैं।
मेरठ के बुलंदशहर तक करीब 61.19 किलोमीटर लंबे राजमार्ग 235 का वर्ष 2011 में चौड़ीकरण शुरू हुआ था। एनएचएआई ने एक प्राइवेट कंपनी से सर्वे कराकर रोड का ड्राइंग तैयार कराया था। धरातल पर कार्य 2015 में शुरू हुआ। राजमार्ग का निर्माण एपको इंफ्राटेक प्रा. लिमिटेड कर रही है। पहले इस प्रोजेक्ट का पूरा करने का समय अक्तूबर 2019 था। किसानों के विरोध के चलते कई जगह पर बदलाव किए गए। निर्माण कंपनी को मार्च 2020 तक का समय दिया गया है। जहां मेरठ से हापुड़ के बीच में गांव फफूंड़ा, कस्बा खरखौदा, कैली में एवं गुलावठी में कुल 25.5 किलोमीटर बाईपास है। शेष 35.69 किलोमीटर रोड का चौड़ीकरण किया जाना है। मेरठ से हापुड़ के बीच में तीन बाईपास समेत करीब 27 किलोमीटर लंबी सड़क का 90 प्रतिशत निर्माण पूर्ण हो गया है। निर्माण कंपनी 30 जून तक कैली फ्लाईओवर व हापुड़ में रेलवे क्रासिंग को छोड़कर पूरे रोड को चालू करने का दावा कर रहा है।
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वहीं, हापुड़ से बुलंदशहर के बीच बनाए जाने वाली करीब 34 किलोमीटर रोड पर निर्माण कंपनी अभी केवल 60 प्रतिशत कार्य होना बता रही है। वहीं, गुलावठी बाईपास पर निर्माण रुका हुआ है। सात किलोमीटर लंबा यह बाईपास गांव मोड़ी से मिटठेपुर के बीच बनाया जाना है। इसके लिए पर्याप्त अधिग्रहण नहीं होने के कारण जमीन कम पड़ गई है।
एनएचएआई ने जमीन के बैनामे की बात कही
एनएचएआई ने कार्य समय से पूरा करने के लिए जमीन का 2019 के रेट से बैनामा करने के लिए कह दिया परंतु किसानों ने उक्त जमीन के लिए नए सिरे से गजट निकालने के बाद ही अधिग्रहण प्रक्रिया कराने की सहमति दी।
गलती एनएचएआई की भुगतनी पडे़गी सभी को
एनएचएआई जब भी किसी रोड का निर्माण कराती है तो उस प्रोजेक्ट पर अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग कंपनियों को ठेका देता है। उसमें सबसे पहले जमीनों का सर्वे करने के लिए भी एनएचएआई ने प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया। उस सर्वे के कारण ही ये मामला उठा। इसका खामियाजा पहले रोड से आने जाने वालों, निर्माण कंपनी एवं क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ा। इस कारण से रोड का कार्य समय से पूर्ण नहीं हो पाने से जाम समेत कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
एनएचएआई का दावा गजट निकाल दिया
एनएचएआई का दावा है कि बुलंदशहर से गुलावठी बाईपास के लिए नए अधिग्रहण के लिए गजट निकाल दिया है। वहीं, किसानों का आरोप है कि पहले तो लोकसभा चुनाव को लेकर लगी आचार संहिता के चलते गजट नहीं निकाला गया। अब एनएचएआई किसानों को झूठा आश्वासन दे रही है। जहां चार दिन पहले गुलावठी क्षेत्र के दर्जनभर किसान एनएचएआई के परियोजना निदेशक से मिले भी है। अब एनएचआई ने 18 जून का गजट का समय दिया है।
फफूंड़ा में भी हो चुकी है चूक
फफूंड़ा बाईपास निर्माण के लिए खसरा संख्या 154 व 156 के अधिग्रहण में भारी चूक हो चुकी है। जहां एक खसरे से अधिक जमीन लेनी थी लेकिन ली कम। रोड के निर्माण के लिए जमीन की अवश्यकता पड़ी तो बाद में एनएचआई ने उक्त किसान की जमीन का बैनामा किया था।
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एनएचएआई ने रोड का निर्माण नहीं किया। इसके प्रत्येक काम के लिए अलग-अलग कंपनियों को ठेका दिया। जिसमें सर्वे कर रही कंपनी की चूक के कारण ये सब हुआ। अब इसका गजट तैयार हो गया है। जल्द ही जमीनों का अधिग्रहण किया जाएगा।-डीके चतुर्वेदी, परियोजना निदेशक एनएचएआई मेरठ
अभी गजट नहीं निकाला गया है। इसके बाद सभी किसान को मुआवजे राशि मिलने तक जमीनों पर कब्जा नहीं दिया जाएगा। सोनू, किसान नेता
कपंनी जमीनों के अधिग्रहण के इंतजार में है जमीन मिल जाएगी तुरंत ही गुलावठी बाईपास पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जीआर सारस्वत, प्रोजेक्ट मैनेजर
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