कर लें तैयारी, जीएसटीआर-9 भरना है जरूरी
- पोर्टल पर दाखिल करें जीएसटी का वार्षिक रिटर्न
- 2017-18 का पहली बार भरा जाएगा सालाना जीएसटीआर-9
- नहीं भरने पर 200 रुपये लगेगी प्रतिदिन लेट फीस
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सरकार जीएसटी का वार्षिक रिटर्न फार्म जीएसटीआर-9 जारी कर चुकी है। यह 2017-18 के लिए भरा जाएगा। इसके लिए अंतिम तारीख 30 जून है। पोर्टल पर जाकर इसे भरा जा सकता है। यह भरना जरूरी है। इसे लेकर व्यापारियों में कई तरह की संदेह और जिज्ञासाएं हैं, जिन्हें वाणिज्य कर विभाग दूर करने की कोशिश कर रहा है।
वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर वीएन सिन्हा ने बताया कि जीएसटीआर-9 वह रिटर्न फार्म है, जो जीएसटी सिस्टम में रजिस्टर्ड कारोबारियों को हर साल के अंत में भरना पड़ता है। कारोबारी ने सालभर के व्यापार के दौरान जो मासिक या तिमाही रिटर्न (जीएसटीआर-1,2,3,4 और 8) भरे होते हैं, उन सभी जानकारियों का इकट्ठा विवरण इसमें दर्ज करना होता है। कंपोजिशन स्कीम, ई कॉमर्स ऑपरेटर्स को भी यह रिटर्न भरना अनिवार्य है।
टेक्सेशियों अकादमिक फोरम के महासचिव भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि जीएसटी में प्रत्येक रजिस्टर्ड व्यक्ति को 2017-18 वर्ष केलिए वार्षिक विवरणी (जीएसटीआर-9) 30 जून तक प्रस्तुत करनी है। कम्पोजिशन के तहत रजिस्टर्ड व्यक्तियों को जीएसटी आर-9 प्रस्तुत करनी है। वार्षिक विवरणी प्रस्तुत न करने पर 200 रुपये प्रतिदिन की लेटफीस अधिकतम प्वाइंट 5 प्रतिशत टर्नओवर का जो भी कम हो देय होगी। दो करोड़ से अधिक टर्न ओवर वाले व्यक्तियों के लिए ऑडिट रिपोर्ट जीएसटी आर9 सी में प्रस्तुत करना है। इसे समय से प्रस्तुत न करने पर जीएसटी आर की तरह लेट फीस देय होगी।
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ऑडिट से बचना है तो सभी तथ्य फार्म में एक साथ भरें
जीएसटी संवेदनशील विधिक प्रक्रिया है, जिसमें जरा सी कमी फ्रॉड की श्रेणी में आ सकती है। जीएसटी एक्ट के तहत 31 दिसंबर तक रिटर्न भरे जाने होते हैं, लेकिन सरकार द्वारा समयावधि 30 जून तक बढ़ाकर लाभान्वित किया गया है। लेकिन 72 महीने की अवधि विलंब होने पर खाते सीज हो सकते हैं। अगर जीएसटी ज्यादा वसूला गया है तो वह जब्त होगा और कम जमा किया गया है तो वह वसूले जाने का प्रावधान है। दोबारा ऑडिट से बचने केलिए सभी तथ्य फार्म में एक साथ ही भरें तथा जीएसटी रजिस्ट्रेशन में पैन के स्थान पर टैन का प्रावधान दिया जाना उचित होगा।
रिवाइज भी भरना पड़ सकता है फार्म
रूल 57 के अनुसार आईटीसी का लाभ पाने के लिए 180 दिन का पेमेंट शेड्यूल पूरा न होने पर रिवाइज रूप में फार्म भरना होगा। धारा 17(5) के अनुसार सचल दल आदि द्वारा वसूला टैक्स सामान्यत: असेसमेंट में कर निर्धारण में एडजस्टमेंट मिलने में तकनीकी परेशानी आने की स्थिति है।