700 मीटर तक रहा असर, साफ दिखी दहशत
- अमोनिया गैस का रिसाव होने पर आसपास के लोग घरों को बंद कर सुरक्षित स्थान पर निकले
- रेलवे रोड क्षेत्र के अलावा आनंदपुरी, जैननगर में भी दिखाई दिया गैस का असर
- बर्फखाना के आसपास के इलाकों में मची भगदड़, दुकान छोड़ भागे व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। रविवार देर शाम रेलवे रोड एरिया में अमोनिया गैस रिसाव की दहशत फैल चुकी थी। करीब 700 मीटर दूर तक गैस का ऐसा असर था कि पुलिस-प्रशासन के भी पसीने छूट गए। रेलवे रोड पर पुलिस ने आवागमन रोक दिया। देर रात तक भी भी लोगों में दहशत का माहौल था।
बर्फखाना से सटे आनंदपुरी और जैननगर के लोग सबसे अधिक दहशत में दिखाई दिए। कुछ ही देर में चर्चा होने लगी कि कुछ परिवार दहशत के चलते अपने घरों पर ताले लगाकर सुरक्षित स्थानों के लिए निकल गए हैं। करीब दो घंटे बाद जब गैस का असर कम हुआ, लोग घर लौटने लगे। काफी देर तक लोग इस रिसाव की जानकारी लेते रहे। जिस जगह बर्फखाना है, उसके आसपास काफी आबादी है। शाम के समय यहां अच्छा खासा बाजार लगता है, जहां लोग परिवारों के साथ पहुंचते हैं। आमतौर पर आनंदपुरी और जैननगर के अलावा कुछ हद तक ईदगाह क्षेत्र के लोग ही यहां पहुंचते हैं। जिस समय गैस का रिसाव शुरु हुआ, उस समय बर्फखाने की मुख्य सड़क पर काफी भीड़ भाड़ थी।
यहीं कुछ दूरी पर चाऊमीन का ठेला लगा था, जिस पर काफी भीड़ लगी थी। गैस रिसाव से पहले यहां खड़े लोग डर गये। लेकिन जैसे ही वह गैस के संपर्क में आये, उनमें भगदड़ गई। आसपास की कई दुकानों के भी शटर गिरने शुरू हो गए। गैस बर्दाश्त नहीं हो पा रही थी। आंखों में जलन होने के साथ ही सांस लेने में दिक्कत और शरीर पर जलन होने का अहसास पाकर ठेले के आसपास जमा लोग भागने लगे। ठेला संचालक सचिन भी वहां से भाग निकला। इस बीच दमकल व पुलिसकर्मियों को आता देखकर लोगों की जान में जान आई। गैस का असर कम हुआ तो फिर दुकानें खुलने शुरू हो गए।
जानलेवा भी है अमोनिया गैस
एफएसओ संजीव कुमार सिंह ने बताया कि अमोनिया गैस भारी होती है। ऐसे में हवा के साथ यह जितनी दूर तक पहुंचती है, केवल उतने एरिया में ही असर दिखाती है। अधिक रिसाव की स्थिति में यह घातक साबित हो सकती है। इसके संपर्क में आने पर सबसे पहले शरीर और आंखों में जलन शुरू हो जाती है। यह काफी ठंडी होती है और अधिक संपर्क में आने पर यह शरीर के खुले स्थान पर घाव कर देती है। सांस के साथ शरीर के अंदर प्रवेश कर फेफड़ों को प्रभावित कर देती है। अगर रिसाव अधिक होता है और वह रुक नहीं पाता तो कभी-कभी आसपास के क्षेत्र भी खाली कराने पड़ जाते हैं। दमकलकर्मियों ने पुलिस के सहयोग से बर्फखाने के पीछे की ओर वाले दोनों रास्तों पर लोगों की आवाजाही रुकवा दी। काफी देर तक लोगों में दहशत की स्थिति बनी रही।
जान जोखिम में डालकर काम करते रहे कर्मचारी
बर्फखाने के जिस भाग में अमोनिया गैस का रिसाव हुआ था, वहीं से चंद कदमों की दूरी पर आलू और फलों का कोल्ड स्टोर भी है। एक तरफ अफरातफरी मची थी तो वहीं इस कोल्ड स्टोर के कर्मचारी पसीना बहाने में लगे थे। कुछ लोगों ने जाकर उन्हें वहां से हटाने का प्रयास भी किया। लेकिन न जाने कर्मचारी किस दबाव में थे, वहां से हट नहीं सके। हैरत वाली बात यह थी कि इन कर्मचारियों में महिलाएं भी मौजूद थीं।
काफी नहीं दिखे चेंबर में सुरक्षा के इंतजाम
अमोनिया चेंबर बेहद संवेदनशील माना जाता है। एक मामूली सा रिसाव कभी-कभी बड़े हादसे का कारण बन जाता है। बावजूद इसके बर्फखाने में कोई खास इंतजाम नहीं किए गए थे। आमतौर पर गैस रिसाव के बाद पानी की बौछार मारते हुए उसकी क्षमता को कमजोर किया जाता है। यहां पानी तो था। लेकिन पानी की मोटर की क्षमता से काफी कमजोर थी। दमकलकर्मियों ने काफी देर चेंबर में पानी की बौछार की। इसके बाद उन्होंने जेनरेटर की मदद से अतिरिक्त पानी की मोटर लगाकर पानी का छिड़काव चेंबर में शुरू कराया।