मेरठ। माह रमजान के आखिरी जुमा अलविदा को मस्जिदों में नमाजियों का सैलाब उमड़ पड़ा। मस्जिदों की छतों, सड़कों, बराबर में खाली पड़ी जगहों आदि पर जिसे जहां साफ जगह मिली, वहीं पर खुदा की बारगाह में सजदा कर दिया। नमाज के बाद सभी ने अपने गुनाहों से तौबा की और खुशहाली व तरक्की की दुआएं अल्लाह से मांगीं। शहर काजी ने बताया कि ईद की नमाज दिल्ली रोड स्थित शाही ईदगाह में सुबह 7.45 बजे होगी।
शाही जामा मस्जिद समेत शहर की सभी मस्जिदों में लोग वक्त से पहले ही आना शुरू हो गए थे। जैसे-जैसे घड़ी की सुई बढ़ती रही, मस्जिदों में नमाजियों की तादाद बढ़ती रही। जुमे की नमाज में जमात का वक्त पौने एक बजे से लेकर ढाई बजे तक रहा। सभी जगह मस्जिदें बंदों से खचाखच भरी थीं। शाही जामा मस्जिद में शहर काजी जैनुस साजिदीन ने नमाज पढ़ाई। खुतबे में उन्होंने रमजान की अहमियत बयान की। कहा कि रमजान का मुबारक महीना गुजर रहा है और ईदुल फितर का त्योहार नजदीक है। ईद के मौके पर अदा किए जाने वाले फितरे के बारे में बताया कि गेहूं की मौजूदा कीमत के मुताबिक, हर परिवार को अपने प्रत्येक सदस्य की तरफ से ईद की नमाज से पहले लगभग 40 रुपये फितरे के रूप में गरीबों को देना फर्ज है। मालदार व्यक्ति को खजूर की कीमत के मुताबिक प्रति सदस्य 400 रुपये गरीब को देना चाहिए। कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने भी जकात और फितरे की अदायगी के बारे में बताया।
जो अपने कर्मचारी का काम कम कर दे, उसे मिलता है सवाब
खैरनगर बाजार की हौज वाली मस्जिद, इमलियान मस्जिद हापुड़ रोड पर भी नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। इम्लियान मस्जिद में नमाजियों की तादाद बढ़ने पर एक साइड पर सफें बिछा दी गईं, जबकि एक साइड से ही वाहनों को निकाला गया। यहां सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रही। इम्लियान मस्जिद के इमाम मौलाना हाफिज इमरान, गोला कुआं की दरियागंज मस्जिद के इमाम मौलाना जिब्राईल ने बताया कि रमजान के आखिर के दस दिन जहन्नुम से निजात दिलाने के हैं। इस मुबारक महीने में जो शख्स अपने नौकर या कर्मचारी आदि के काम को कम कर दे, उसे बेहद सवाब मिलता है और अल्लाह उसकी मगफिरत फरमाते हैं। इस महीने में चार चीजों पर ध्यान देना चाहिए, कलमा तय्यबा, इस्तखफार, जन्नत की तलब और दोजख से निजात। नमाज के बाद सभी मस्जिदों में मुल्क की तरक्की, खुशहाली, मरीजों की सेहतयाबी, सबकी हिफाजत, भाईचारे और अमन की दुआ की गई।
मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से मुसलमान मायूस : शहर काजी
जुमा अलविदा की नमाज से पहले शहर काजी जैनुस साजिदीन ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने एक भी सुन्नी मुसलमान को मंत्री नहीं बनाया है। इससे पूरे देश के करोड़ों मुसलमान मायूस हैं। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते, तो किसी भी प्रदेश के मुस्लिम कद्दावर नेता को बाहर से भी मंत्री बना सकते थे। शहर काजी ने कहा कि मोदी देश के मुसलमानों को दूसरे दर्जे का बनाना चाहते हैं, जबकि देश की आजादी में मुसलमानों की अहम कुर्बानी शामिल रही है। मुसलमानों के देशप्रेम और कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता।