भगवान जिनेंद्र के अभिषेक से शांतिनाथ विधान शुरू
हस्तिनापुर। श्री दिगम्बर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान में आज बृहस्पतिवार को सर्वप्रथम भगवान जिनेन्द्र का अभिषेक हुआ ।
आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य आदर्श जैन, पूनम जैन, उदित जैन, अनुप्रेक्षा जैन को प्राप्त हुआ। क्षेत्र पर विराजमान मुनिश्री भावभूषण जी महाराज एवं मुनिश्री भव्य भूषण जी महाराज सभा के मध्य कहा कि मां तो सैकड़ों पुत्रों को जन्म देती है किन्तु श्रेष्ठ मां वह जो तीर्थंकर जैसे बालक को जन्म देती है और स्वयं एकभव अवता होकर आत्म कल्याण कर लेती है। पूर्व दिशा ही सूर्य के प्रकाश को प्रकाशित करती है और समस्त लोक उससे प्रकाशित हो जाते हैं। किंतु अन्य दिशाएं सैकड़ों ताराओं से प्रकाशित होती है। किन्तु सूर्य प्रकाश के कारण सब फीके पड़ जाते हैं। जिनेन्द्र भगवान की भक्ति में कहा गया है कि अगर तीर्थंकर जैसे बालक को जो माता जन्म देती है वह सर्वोत्रकृष्ट है वह तीर्थंकर की मां कहलाती है और तीर्थंकर मातृत्व ही सर्वोत्रकृष्ट फल है। सायंकालीन महाआरती व भजन संध्या तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। जिसके पुरस्कार चंदन जैन, वीना जैन द्वारा दिए गए। आज इस कार्यक्रम में आज विधान के 17वें दिन 100 परिवारों की ओर से विधान हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, उपाध्यक्ष सतेन्द्र कुमार, विनय कुमार मवाना, रोहित जैन, शशांक जैन, नवीन जैन, विजय कुमार, मुकेश कुमार (महाप्रबंधक), अशोक जैन (उपप्रबंधक), उमेश जैन, अतुल जैन, मणिचंद जैन, कमल जैन आदि का सहयोग रहा।