फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झाड़-फूंक से आएं बाज, मानसिक रोग का कराएं इलाज, मानसिक स्वास्थ्य विभाग चला रहा अभियान

Mon, 27 May 2019 02:31 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
तंत्र मंत्र
विज्ञापन
चुपचुप रहता है, अकेले में बड़बड़ाता रहता है। टोना टोटका करो तो हमला करने लगता है। जरूर कोई ऊपरी हवा का चक्कर है। ऐसे तमाम मामलों में इलाज न कराकर मरीज के परिजन झाड़-फूंक पर ज्यादा भरोसा करते हैं। ऐसे करीब 30 फीसदी मरीज हैं, जो मानसिक रोगी होने के बाद भी इलाज नहीं कराते।
विज्ञापन


लिहाजा ऐसे मरीजों तक पहुंचने के लिए जिला अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य विभाग की टीम सप्ताह में तीन दिन कैंप लगाकर ऐसे मरीजों को तलाश कर रही है। खासकर ऐसे धार्मिक स्थलों पर जहां काफी संख्या में इस तरह के मरीजों के होने का अनुमान रहता है। इन कैंपों में ऐसे काफी संख्या में मरीज मिल रहे हैं, जो मानसिक रोगी हैं, लेकिन वह अपना इलाज नहीं करा रहे थे और झाड़-फूंक के चक्कर में थे।

मानसिक स्वास्थ्य विभाग चला रहा अभियान
ऐसे मरीजों को तलाशने के लिए मानसिक रोग विशेषज्ञों की टीम जो अभियान चला रही है। उसका नाम है ‘दुआ से दवा तक।’ यह कैंप हर मंगलवार, बृहस्पतिवार और शनिवार को अलग-अलग स्थानों पर लगाया जाता है। इन कैंपों में लोगों को जागरूक किया जाता है।

ओपीडी में आते हैं 200 से 250 मरीज
जिला चिकित्सालय के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में हर रोज 200 से 250 मरीज आते हैं। इसमें ज्यादातर मरीजों की उम्र 25 से 45 साल की रहती है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अभी भी 30 फीसदी मरीज अस्पताल या चिकित्सक तक नहीं पहुंचते हैं।

पहले करते हैं धार्मिक गुरुओं से बात, फिर लगाते हैं कैंप
स्वास्थ्य विभाग की टीम कैंप लगाने से पहले धार्मिक गुरुओं से बात करती है। उनको आस्था के साथ इलाज की जरूरत भी बताते हैं। उनको भरोसे में लेकर यहां शिविर लगाकर मरीजों को इलाज और काउंसिलिंग दी जाती है।
विज्ञापन

लोगों को किया जा रहा जागरूक
अभियान को सफल बनाने के लिए समाजसेवी और विभिन्न धर्मों के प्रबुद्ध वर्गों की भी मदद ली जाती है। चिकित्सक संगोष्ठी कर इनको मानसिक बीमारियों के बारे में जागरूक किया जाता है। तनाव में रहना, नींद प्रभावित होना, घबराहट और बेचैनी होना जैसी बीमारी सामान्य मानसिक रोग में आती है। ऐसे मरीजों की काउंसलिंग बेहद जरूरी रहती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर मरीज अवसाद, उन्माद को साथ सिजोफ्रेनिया का शिकार हो जाता है। -डॉ. कमलेंद्र किशोर, मानसिक रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
 
बाद में कराने आते हैं इलाज
आमतौर पर मिर्गी, हिस्टीरिया जैसी बीमारी होने पर शुरू में लोग झाड़-फूंक कराने जाते हैं। कई बार ऐसे मरीजों को पता ही नहीं होता कि उनकी बीमारी का इलाज संभव है और उनको सही दवा मिले तो वे स्वस्थ हो सकते हैं। मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज भूत प्रेत से छुटकारे के लिए झाड़ फूंक कराने जा चुके होते हैं। -डॉ. विभा नागर, काउंसलर, जिला अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें