लोगों को किया जा रहा जागरूक
अभियान को सफल बनाने के लिए समाजसेवी और विभिन्न धर्मों के प्रबुद्ध वर्गों की भी मदद ली जाती है। चिकित्सक संगोष्ठी कर इनको मानसिक बीमारियों के बारे में जागरूक किया जाता है। तनाव में रहना, नींद प्रभावित होना, घबराहट और बेचैनी होना जैसी बीमारी सामान्य मानसिक रोग में आती है। ऐसे मरीजों की काउंसलिंग बेहद जरूरी रहती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर मरीज अवसाद, उन्माद को साथ सिजोफ्रेनिया का शिकार हो जाता है। -डॉ. कमलेंद्र किशोर, मानसिक रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
बाद में कराने आते हैं इलाज
आमतौर पर मिर्गी, हिस्टीरिया जैसी बीमारी होने पर शुरू में लोग झाड़-फूंक कराने जाते हैं। कई बार ऐसे मरीजों को पता ही नहीं होता कि उनकी बीमारी का इलाज संभव है और उनको सही दवा मिले तो वे स्वस्थ हो सकते हैं। मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज भूत प्रेत से छुटकारे के लिए झाड़ फूंक कराने जा चुके होते हैं। -डॉ. विभा नागर, काउंसलर, जिला अस्पताल