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खतरे में जान, सुरक्षा के नाकाफी इंतजाम

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असुरक्षित गंगनहर पटरी
24 घंटे के अंदर दो कार गिर चुकीं गंगनहर में
हर हादसे के बाद होते हैं दावे, बाद में हो जाते हैं हवा
गंभीरता से नहीं होती गंगनहर पटरी मार्ग को सुरक्षित करने की कवायद
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ/सरधना। गंगनहर पटरी असुरक्षित हो चुकी है। वाहन कब अनियंत्रित होकर गंगनहर में जा गिरे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। 24 घंटे में इस पटरी मार्ग पर दो बड़े हादसे हो चुके हैं। दो कार नहर में गिरी। एक हादसे में पांच लोगों की मौत हो चुकी है तो दूसरी कार का पता तक नहीं चल पाया है। चिंताजनक बात यह है कि सिस्टम हादसे रोकने की कोशिशों के बजाय केवल दावे करता है और ये दावे भी बाद में हवा हो जाते हैं।
हर हादसे के बाद प्रशासन और लोकनिर्माण विभाग गंगनहर पटरी मार्ग पर हाइट गेज लगवाने, स्पीड ब्रेकर बनवाने, बैरियर लगाने, पथ प्रकाश की व्यवस्था दुरुस्त कराने के दावे करता है। लेकिन मामला ठंडा होते ही दावों को अगला हादसा होने तक ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। मेरठ जनपद की सीमा में चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग की लंबाई 42 किमी है। गंगनहर पटरी पर कांवड़ मार्ग बनने के बाद न जाने कितने लोगों की सड़क हादसे व वाहन के गंगनहर में समा जाने पर जान चली गई। मुरादनगर से मुजफ्फरनगर, हरिद्घार तक लोग यहां से निकलते हैं। यह मार्ग इस कदर असुरक्षित हो गया है कि परिवार का परिवार पल भर में नहर में समा जाता है।
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वर्ष 2018 में गंगनहर में वाहनों के गिरने से 60 लोगों की जान जा चुकी है। इस साल भी कई हादसे हो चुके हैं। कई वाहन चालक सड़क हादसे में घायल भी हुए। जिसकी गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान मौत हो गई। कांवड़ मार्ग पटरी के चौड़ीकरण के बाद से हादसों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। लोगों ने लगातार बढ़ रहे हादसों को रोकने के लिये पुलिस प्रशासन के साथ लोकनिर्माण विभाग से ठोस कदम उठाने की मांग की है।
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इसलिए होते हैं हादसे
गंगनहर पटरी मार्ग जबसे बेहतर हुआ तो वाहन ओवरस्पीड रहते हैं। अधिकांश हादसे रात को या अलसुबह होते हैं। गंगनहर के किनारों पर कोई अवरोधक नहीं हैं। यदि कहीं हैं भी तो एक फीट ही ऊंचे ही हैं। अक्सर तेज रफ्तार वाहन पहिया फटने, पहिया गड्ढे में पड़ने, चालक के झपकी लेने या दूसरे वाहन से टकराने के बाद अनियंत्रित होता है तो पटरी पर अवरोधक न होने से सीधे गंगनहर में जा गिरता है।
गंगनहर पटरी मार्ग पर बड़े हादसे :
14 सितंबर 2013 : जानी क्षेत्र में नोएडा निवासी एक ही परिवार के सात लोग गंगनहर में कार गिरने पर डूबे।
2013: कांवड़ यात्रा के दौरान मानपुरी के निकट गंगनहर में गिरा मैजिक वाहन। चार कांवड़ियों की मौत।
25 दिसंबर 2018: नानू भलसोना गंगनहर पुल के बीच गंगनहर में कार गिरी। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत।
13 दिसंबर 2018 : पूठ पुल के निकट नहर में गिरी कार। एक इंजीनियर की मौत, दूसरे को बचा लिया गया।
07 दिसंबर 2018 : 18 टायरा ट्रक नानू गंगनहर पुल से नहर में गिरा। दो दिन बाद निकाला ट्रक। क्लीनर की मौत।
18 अप्रैल 2019: कांवड़ मार्ग पर स्कॉर्पियों सवार तीन युवकों की जान गई।
23 अप्रैल 2019: कांवड मार्ग पर टीकरी गांव के सामने बाइक सवार युवक की मौत।
20 जनवरी 2019 : रोहटा क्षेत्र में ही नहर में कार गिरने से तीन लोगों की मौत।
25 मई 2019: अर्टिगा कार गंगनहर में गिरी। देवरिया के पांच लोगों की मौत, एक महिला लापता।
26 मई 2019: सलावा झाल के निकट अज्ञात कार नहर में समाई।
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गंगनहर पटरी मार्ग पर ये हों इंतजाम
- सुरक्षा व्यवस्था के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाए
- नहर किनारों पर मजबूत अवरोधक बनाए जाएं।
- पथ प्रकाश की आवश्यक व्यवस्था हो।
- हर मोड़ पर रिफ्लेक्टर बोर्ड लगाए जाएं।
- पुलों पर हाइट गेज लगाए जाने चाहिए।
- थोड़ी-थोड़ी दूरी पर स्पीड ब्रेकर बनने चाहिए।
- पुलिस द्वारा जिगजैग बैरियर लगाकर चेकिंग की जाए
- मार्ग गड्ढा मुक्त हो। समय-समय पर आला अधिकारी करें निरीक्षण
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