परंपरागत मतदाताओं ने छोड़ा हाथ का साथ
कैंट विधानसभा
- कैंट विधानसभा में तीन बूथों पर मिले 100 से 230 मत
- एक बूथ पर तो कांग्रेस को एक भी मत नहीं मिल पाया
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। कैंट विधानसभा में भाजपा की आंधी ऐसी चली कि परंपरागत वोट ने भी हाथ का साथ छोड़ दिया। पूरे विधानसभा क्षेत्र में केवल तीन बूथ ऐसे मिले हैं जहां पर कांग्रेस को 100 से 230 मत मिले। एक बूथ पर तो कांग्रेस का हाथ थामने वाला कोई नहीं मिला। कैंट के कई बूथों पर बसपा ने भाजपा से भी अधिक मत प्राप्त किए हैं। लोकसभा चुनाव में कुल मिलाकर कांग्रेस कैंट विधानसभा में 12090 मतों में ही सिमटकर रह गयी।
कैंट विधानसभा कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। 1989 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यह सीट कांग्रेस से ऐसी छीनी कि उसके बाद भाजपा का कब्जा चुनाव दर चुनाव मजबूत होता गया। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि अब कांग्रेस कैंट में सबसे कमजोर पार्टी के रूप में नजर आती है। इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मात्र 12 हजार वोटों पर ही सिमट गया। हालांकि यह भी गौरतलब है कि कांग्रेस प्रत्याशी को सबसे ज्यादा वोट भी कैंट विधानसभा से ही मिले।
कैंट विधानसभा में भाजपा, बसपा, कांग्रेस की स्थिति पर ही गौर करें तो कांग्रेस के पक्ष में पड़े मत चौंकाने वाले हैं। कैंट विधानसभा में 429 बूथों पर वोट पड़े। इनमें से केवल तीन बूथ स्पोर्ट्स स्टेडियम के कमरा नंबर तीन में 230 मत, स्पोर्ट्स स्टेडियम कमरा नंबर पांच में 100 मत, स्वामी विवेकानंद प्राथमिक विद्यालय थापर नगर में 176 मत कांग्रेस के पक्ष में पड़े। वहीं प्रावि तोपखाना कमरा नं दो में कांग्रेस के पक्ष में एक भी मत नहीं डाला। इसके अलावा 425 बूथों पर एक मत से लेकर 100 से कम ही मत मिल पाए।
कैंट में मुस्लिम और दलित बूथ ऐसे रहे जहां पूरी तरह बसपा प्रत्याशी की भाजपा पर एक तरफा बढ़त रही। लेकिन कुल मिलाकर कैंट विधानसभा अपने पुराने चलन पर ही चलती नजर आई। भाजपा के गढ़ में जमकर वोट बरसे और यही कारण रहा कि कैंट ने अकेले दम पर भाजपा की जीत सुनिश्चित कर दी।