सरूरपुर/मेरठ। जिस स्थान पर तड़के 4:45 बजे हादसा हुआ, उससे करीब 400 मीटर की दूरी पर यूपी 100 पुलिस की पीआरवी 581 मौजूद थी। सूचना पर यूपी 100 पुलिस दो मिनट में ही मौके पर पहुंच गई और सिटी व देहात कंट्रोल रूम को हादसे की सूचना दी। इस दौरान आसपास के आधा दर्जन युवक भी बचाव में जुट गए। 4:57 बजे एसओ रोहटा धनवीर सिंह मौके पर पहुंचे। जेसीबी और क्रेन के अलावा गांव के लोग रस्सा लेकर पहुंच गए। एसओ का हमराह सिपाही और यूपी 100 के पुलिसकर्मी रस्से की मदद से नहर में उतर गए। उस समय अर्टिगा कार का कुछ भाग ही पानी में दिख रहा था। पुलिसकर्मियों ने सोनी, शालिनी, देवी प्रसाद, आशा और आराध्या की जान बचा ली। जबकि रिंकी का पता नहीं चला। बाद में एसपी देहात अविनाश पांडेय ओर सीओ पंकज सिंह भी पहुंच गए। यूपी 100 के नोडल अधिकारी संजीव वाजपेयी के अनुसार पुलिस का रिस्पांस दो मिनट का रहा, जिससे पांच लोेगों की जान बचाई जा सकी।
चार साल की आराध्या ने जीती जिंदगी
पुलिस और आसपास के लोग जब नहर में उतरे तो कार का पीछे का शीशा निकल गया और बच्चे बहने लगे। तभी तेज बहाव में चार साल की आराध्या बहने लगी। उसको रस्से में फंसाकर सकुशल बाहर निकाला गया। एसओ ने बताया कि सभी खिड़की बंद थीं। बस पिछला शीशा गायब था, जहां से महिला पानी में बह गई।
ग्रामीणों ने जताया गुस्सा
इस हादसे पर प्रतिक्रिया देते हुए आसपास के ग्रामीणों गांव पूठखास निवासी सलीम, नीरज, संजय बावरा, सुरेश, प्रमोद राणा, इरशाद अली, डॉ. इद्दा शाह, संजय ठाकुर ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते डोले की ऊंचाई और न बढ़ाई तो गंगनहर के किनारों पर फर्राटा भरने वाले वाहनों को गंगनहर में गिरने से कोई रोक नहीं पाएगा। कहा कि काफी पहले पटरी की सड़क का निर्माण होने पर वाहनों को नहर में गिरने से रोकने के लिए तीन फीट ऊंचा ईंटों का डोला बनाया गया था। बार-बार सड़क बन जाने के कारण इसकी ऊंचाई अब मात्र एक फीट रह गई है। इसे कम से कम तीन फीट बढ़ाया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि हादसे रोकने के लिए न तो प्रशासन गंभीर है और न जनप्रतिनिधि।