60 लोगों की हुई थी वर्ष 2018 में मौत
20 से ज्यादा लोग वाहन समेत नहर में गिर चुके इस साल
गंगनहर में कार गिरने पर पांच लोगों की मौत का मामला
पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के बड़े-बड़े दावे निकले हवाई
न लाइट की व्यवस्था न ही नहर पटरी मार्ग पर है रेलिंग
स्पीड ब्रेकर और बैरियर लगाने के दावे भी हुए फेल
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। गंगनहर पटरी पर हादसे रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के बड़े-बड़े दावे हवाई साबित हो रहे हैं। गंगनहर पटरी को सुरक्षित करने का मसला कई बार उठा। लेकिन हर बार दावों में दब जाता है। शनिवार को फिर नहर में कार गिरने के बाद पांच लोगों की मौत हो गई। सरकारी विभाग हमेशा की तरह एक-दूसरे की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ने लगते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि इस लापरवाही और उदासीनता का जिम्मेदार कौन है।
हरिद्वार और गाजियाबाद के बीच मेरठ जिले की सीमा में गंगनहर पटरी मार्ग की लंबाई 42 किमी है। काफी जर्जर हो चुकी सड़क का जबसे निर्माण हुआ है, यहां वाहनों की स्पीड काफी बढ़ गई। लेकिन अधिकांश स्थानों पर गंग नहर वाली साइड में पटरी की रेलिंग टूटी हुई है। दूर दूर तक भी रेलिंग नहीं है। जहां है, वहां सड़क की मरम्मत कार्य होने पर रेलिंग सड़क के समतल आ गई। वहीं, पथ प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं है। जबकि गंगनहर की गहराई जहां बहुत अधिक है तो पानी का बहाव भी तेज रहता है। कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में कांवड़िए जल लेकर अपने गंतव्य पर पहुंचते हैं। कई बार शासन स्तर से नहर पटरी की दशा सुधारने के निर्देश दिए जा चुके हैं। लेकिन उसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ।
बचाव के इंतजाम नहीं
गंगनहर पटरी मार्ग पर पल भर में तेज रफ्तार वाहन नहर में समा जाते हैं। कई कई दिन तक वाहन नहीं मिलते। जिले में न तो गोताखोरों की टीम है और बचाव के कोई पुख्ता इंतजाम। एनडीआरएफ की टीम को भी गाजियाबाद से बुलाया जाता है। तब तक वाहन काफी दूर बह जाते हैं। मेरठ की सीमा में जानी, रोहटा, सरूरपुर, सरधना थाना क्षेत्र में वर्ष 2108 में 60 लोगों की जान यह नहर ले चुकी है। इस साल भी 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
न रेलिंग लगी न बने स्पीड ब्रेकर
दिसंबर 2018 में सभी सरकारी विभागों की बैठक हुई थी। जिसमें उच्च अधिकारियों ने निर्देश दिए थे कि गंगनहर पटरी मार्ग पर रेलिंग, स्पीड ब्रेकर, हाइट गेज लगाए जाएंगे। लेकिन सभी विभाग सो गए और कुछ नहीं हुआ। उसके तीन माह बाद सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में फिर से यही आदेश उच्च अधिकारियों ने दिए। लेकिन व्यवस्था नहीं सुधरी।
बडे़ हादसे
14 सिंतबर 2013: कार जानी क्षेत्र में गंगनहर में गिरी, गौतमबुद्घ नगर निवासी एक परिवार के सात लोग डूबे।
08 दिसंबर 2018: गंगनहर में ट्रक गिरा, एनडीआरएफ टीम को पांच दिन में ट्रक का सुराग लगा। चालक का शव नहीं मिला।
19 दिसंबर 2018: एचसीएल कंपनी के तीन इंजीनियरों की कार नहर में गिरी। दो की जान बची। एक इंजीनियर का शव एक सप्ताह बाद मिला।
20 जनवरी 2019: रोहटा क्षेत्र में कार गिरने से परिवार के तीन लोगों की मौत।