अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। महानगर में भवन सर्वे के नाम पर लगातार खेल हो रहा है। सर्वे करने वाली कंपनियां शुल्क लेकर चली जाती हैं, लेकिन नगर निगम को इसका फायदा नहीं होता। छह माह डोर टू डोर सर्वे करने वाली कंपनी ने नगर निगम से एक करोड़ रुपये की मांग की है, जबकि सर्वे रिपोर्ट में कई खामियां सामने आई हैं। कंपनी की टीम ने शहर के काफी कामर्शियल भवनों की एआरबी घटाकर प्रस्तुत कर दी। इससे निगम के राजस्व को भारी नुकसान होगा। अब जीआईएस सर्वे करने के लिए नई टीम नगर निगम पहुंची है।
महानगर में एक लाख से अधिक कामर्शियल भवन हैं। इनमें से 30 हजार कामर्शियल भवन ऐेसे हैं जिन पर नगर निगम ने हाउस टैक्स ही नहीं लगाया है। कई भवन ऐसे भी हैं जिन पर कामर्शियल रेट के अनुसार 25 हजार हाउस टैक्स होना चाहिए, लेकिन उसने 2500 रुपये वसूला जा रहा है। इससे विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को भले ही कुछ फायदा पहुंच रहा हो लेकिन नगर निगम को भारी नुकसान हो रहा है। सरकार द्वारा चयनित कंपनी ने पिछले साल महानगर में कामर्शियल भवनों का डोर टू डोर सर्वे किया था। कंपनी को ऐसे भवनों को चिह्नित करना था जिन पर हाउस टैक्स नहीं लगाया है और जिन पर कम हाउस टैक्स लगा है। कंपनी ने सर्वे तो किया, लेकिन काफी भवनों की स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाए। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ऐसे भी उदाहरण सामने हैं जैसे 250 वर्ग गज के भवन में पीछे आवास है और आगे तीन दुकानें बनाई गई हैं। ऐसे भवनों के सर्वे को अलग-अलग कर दिया गया। इसमें भवन की एआरबी यानी एरिया घट गया। यदि इस हिसाब से टैक्स लगाया जाए तो निगम को नुकसान होगा।
निगम को हाउस टैक्स से मिल रहा 35 करोड़
नगर निगम को 2018-19 में हाउस टैक्स से 35 करोड़ रुपये की आय बताई जा रही है। हाउस टैक्स से आय बढ़ाने के लिए बोर्ड की प्रत्येक बैठक में प्रस्ताव रखे जाते हैं। उधर केंद्र सरकार ने सभी निकायों की आय बढ़ाने के लिए कुछ कंपनियों को सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसमें कामर्शियल भवनों के सत्यापन को प्राथमिकता पर लिया गया था। निगम अधिकारियों की माने तो कंपनी ने लगभग 30 हजार कामर्शियल भवनों की सर्वे रिपोर्ट सौंपी है। इसके अनुसार इन भवनों पर निर्धारित दरों के अनुरूप टैक्स लगाया जाए तो निगम की आय बढ़कर 80 करोड़ पहुंच जाएगी।
अब सरकार ने जीआईएस सर्वे के लिए भेजी कंपनी
सरकार ने महानगर के भवनों का जीआईएस सर्वे कराने के लिए एक नई कंपनी भेजी है। अब देखना यह है कि क्या छह साल पहले हुए जीआईएस सर्वे की तरह ही यह सर्वे होगा। यह भी स्पष्ट है कि यदि जीआईएस सर्वे सही किया जाए तो निगम की आय बढ़कर 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष हो जाएगी।
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सर्वे से होगा फायदा
शहर में जीआईएस सर्वे की जरूरत है। नई कंपनी सर्वे करने के लिए आई है। निगम को भवन सर्वे से फायदा तो होगा ही। कामर्शियल भवनों की सर्वे रिपोर्ट में कुछ गलतियां सामने आई हैं। काफी कामर्शियल भवन ऐसे भी सामने आए हैं जिनके आधार पर निगम का राजस्व बढ़ेगा। उस पर काम शुरू कर दिया है। -संतोष शर्मा, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी।