ईश्वर का नाम ही जगत के पाप नष्ट करता है
हस्तिनापुर। दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान में शुक्रवार को मुख्य वेदी में विराजमान त्रय तीर्थंकरों का जलाभिषेक किया गया।
आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य विनोद जैन, मंजू जैन, वुष्टि एवं एकता को प्राप्त हुआ। मुनिश्री भावभूषण जी महाराज ने कहा कि हे नाथ आप की स्तुति करने से जीवों के अनेक भवो के संचित पाप कर्म क्षण भर में क्षय हो जाते हैं। जैसे प्रात: में सूर्य की किरणों से भंवरों की तरह काला जगत में फैला अंधकार तत्काल छिन्न-भिन्न हो जाता है। हे प्रभु! सर्व दुख, दोष नाशिनी आपकी स्तुति की बात क्या केवल आपका नाम लेना ही जगत के पाप नष्ट कर डालता है। जिस तरह सूर्य बहुत दूर रहता हुआ भी प्रकाश करता है तथा कमलों के वन में कमल के फूलों को विकसित कर देता है। उन्होंने बताया कि प्रभु की भक्ति करने से सभी रोगों का क्षय हो जाता है मन तथा आत्मा को शांति प्रदान होती है। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी द्वारा मंत्रो का उच्चारण करते हुए विधान किया गया एवं सायंकालीन मंगलमय प्रवचन भी किए। विधान में सम्मलित सभी भक्तों ने हर्षोल्लास पूर्वक जिनेंद्र भगवान की आराधना की। अनुष्ठान में विधानाचार्य पं. आशीष शास्त्री द्वारा मंत्रोच्चार पूर्वक विधि विधान की क्रियाएं कराई गईं। कार्यक्रम को सफल बनाने में महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, मंत्री प्रद्युम्न जैन, विजय कुमार, राजेन्द्र जैन मवाना, राजीव जैन, देवेंद्र कुमार, शशांक जैन , विनय जैन मवाना, अनिल जैन, वेदप्रकाश जैन, राकेश कुमार, अतुल, महाप्रबंधक मुकेश जैन, उपप्रबंधक अशोक कुमार, उमेश, अतुल, मणिचंद, कमल जैन, सुदर्शन आदि का सहयोग रहा।