नोटा रहा चौथे नंबर पर, आठ प्रत्याशियों से आगे
- 6316 मतदाताओं ने दबाया नोटा का बटन
- 0.52 प्रतिशत वोट पड़े नोटा को
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर हार जीत को लेकर रात तक खींचतान होती रही। हार जीत में नोटा की भी अहम भूमिका रही। नोटा चौथे नंबर पर रहा। नोटा के आगे सिर्फ तीन प्रत्याशी रहे, जबकि शेष आठ प्रत्याशियों से आगे नोटा रहा। मतदान के दौरान 6316 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। अगर यह नोटा न दबता और हारने या जीतने वाले के पक्ष में डलता तो हार जीत में काफी फर्क पड़ सकता था। रिजल्ट भी बदल सकता था और जीत के अंतर को बढ़ा सकता था।
मेरठ में 11 प्रत्याशी थे। नोटा 12वें नंबर पर था। सामान्य शब्दों में नोटा का मतलब यह होता है कि अगर मतदाता किसी प्रत्याशी को पसंद नहीं करता है तो वह नोटा का बटन दबाए। यह एक तरह का विरोध होता है कि मतदाता किसी भी प्रत्याशी को पसंद नहीं करता है। नोटा की बात करें तो ईवीएम पर 6271 लोगों ने नोटा दबाया और 45 लोगों ने पोस्टल वोट केजरिए नोटा का इस्तेमाल किया। कुल वोटों में से 0.52 प्रतिशत वोट नोटा पर पड़े। नोटा से नीचे रहने वाले प्रत्याशियों में बहुजन महापार्टियों के अफजाल को 882 वोट पड़े। शिवसेना की आरती अग्रवाल को 957 वोट पड़े। कर्तव्य राष्ट्रीय पार्टी की किरन सी जाटव को 512 वोट, भारतीय जनता दल के धर्मेंद्र को 489 वोट, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रत्याशी नासिर अली खान को 921 वोट, सर्वोदय भारत पार्टी के राजेश गिरी को 978 वोट, निर्दलीय प्रत्याशी श्रवण कुमार अग्रवाल को 1025 वोट और निर्दलीय सेंसरपाल सिंह को 2215 वोट पड़े। तीन प्रत्याशी भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल, गठबंधन के हाजी याकूब कुरैशी और कांग्रेस के हरेंद्र अग्रवाल ही नोटा से आगे रहे।
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भारत में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं)
भारत में 2009 में भारत के निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अर्र्जी दी कि मतदाता को मतपत्र पर उपरोक्त में से कोई नहीं विकल्प प्रदान करें, जिससे मतदाताओं को किसी भी अयोग्य उम्मीदवार का चयन न करने की आजादी होगी। सरकार इस तरह के विचार के पक्ष में नहीं थी। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज जो एक गैर सरकारी संगठन है ने नोटा के पक्ष में जनहित बयान दर्ज किया। आखिरकार 27 सितंबर 2013 को चुनाव में उपरोक्त में से कोई नहीं वोट पंजीकृत करने का अधिकार भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा लागू किया गया था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने आदेश दिया कि सभी वोटिंग मशीनों में नोटा बटन प्रदान किया जाना चाहिए, ताकि मतदाताओं को उपरोक्त में से कोई नहीं चुनने का विकल्प मिल सके।