पेपर 70 नंबर का, शिक्षक बोले, 100 का मानकर कर लो
मेरठ। सीसीएसयू कैंपस और कॉलेजों में इस बार से एलएलएम में शुरू हुई इंटरनल परीक्षा छात्र-छात्राओं के लिए मुसीबत बन गई है। सबसे ज्यादा परेशानी पूर्व छात्रों को हो रही है। मंगलवार को एलएलएम के सेकेंड सेमेस्टर के कोड-एल-2001 का पेपर 70 अंक का आने से पूर्व छात्र फंस गए हैं। छात्रों ने उन्हें 100 नंबर का पेपर दिए जाने की मांग की तो उनको कह दिया गया कि 70 नंबर के पेपर को ही 100 नंबर का मानकर दे दो। इंटरनल के इस नए नियम से छात्र परेशान हैं। विवि के फैसले के खिलाफ वह कोर्ट भी जा सकते हैं।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने इस बार से एलएलम में बदलाव करते हुए इंटरनल (आंतरिक) परीक्षा शुरू की है। इसमें 70 नंबर का पेपर होगा। 30 नंबर का इंटरनल होगा। हालांकि इस बार से सभी छात्रों के लिए यह व्यवस्था लागू नहीं होने की बात कही गई थी, लेकिन पेपर सभी का 70 नंबर का आ रहा है। इससे सबसे बड़ी मुसीबत में पूर्व छात्र फंस रहे हैं। दरअसल एलएलएम में छात्र बड़ी संख्या में फेल होते हैं। ऐसे में भूतपूर्व छात्रों की संख्या काफी है। एलएलएम सेकेंड सेमेस्टर के छात्रों ने बताया कि मंगलवार को कोड-एल-2001 का वह पेपर देने पहुंचे तो चौंक गए। पेपर 100 नंबर की बजाया 70 नंबर का था। छात्रों ने इसकी शिकायत करते हुए कहा कि वे तो पूर्व छात्र हैं। ऐसे में वह इंटरनल प्रणाली में शामिल नहीं हो रहे हैं। इसके बाद भी उनको 70 नंबर का पेपर दे दिया गया है। छात्रों ने बताया कि उनको कह दिया गया कि सौ नंबर का समझकर ही पेपर ही दे दो। छात्रों का कहना है कि यही पूरी तरह से पढ़ाई का मजाक है।
कैंपस विधि संस्थान के डायरेक्टर कर चुके हैं मना
कैंपस में एलएलएम में इंटरनल परीक्षा कई साल पहले तक थी। लेकिन शिक्षकों पर इंटरनल परीक्षा के दौरान गंभीर आरोप लगने के बाद इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया था। अब दोबारा से छात्रों ने यह मांग की तो इसको आनन-फानन में लागू किया गया। यहां तक कि कैंपस के विधि अध्ययन संस्थान के डायरेक्टर डॉ. सत्यप्रकाश गर्ग से भी इस बारे में राय नहीं ली गई। इस व्यवस्था का मेरठ कॉलेज समेत कई कॉलेजों के शिक्षकों ने विरोध किया लेकिन सबकुछ अनदेखा कर दिया। शिक्षकों का कहना है कि जो व्यवस्था बनाई गई है वह ठीक नहीं है। यही कारण है कि विधि अध्ययन संस्थान के डायरेक्टर डॉ. सत्यप्रकाश गर्ग अब काम करने से मना कर चुके हैं। हालांकि अभी तक कुलपति द्वारा उनके पत्र पर संज्ञान नहीं लिया गया है। मेरठ कॉलेज समेत कई कॉलेजों के शिक्षकों का कहना है कि इस व्यवस्था से एलएलएम की पढ़ाई की गुणवत्ता खराब होगी।