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मान्यता के नए नियमों के विरोध में कोर्ट जाएंगे स्कूल संचालक

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मान्यता के नए नियमों के विरोध में कोर्ट जाएंगे स्कूल संचालक
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मेरठ। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स (सीआईएस) की सामान्य बॉडी बैठक बुधवार को हुई। बैठक का आयोजन कंट्री इन होटल दिल्ली रोड में हुआ। बैठक में स्कूलों को संचालित करने में जो समस्याएं आ रही हैं उन पर वार्ता हुई। परेशानियों को प्रदेश सरकार, शिक्षा विभाग व सीबीएसई की मदद से कैसे दूर किया जाए इस पर वार्ता हुई। शिक्षा नीतियों के बदलावों, मान्यता के नए नियमों व प्रावधानों पर विचार विमर्श हुआ। बैठक में चर्चा का मुख्य मुद्दा स्कूलों की मान्यता के नए नियम रहे। इसके अलावा स्कूल संचालन में आ रही समस्याओं पर भी वार्तालाप हुआ।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा पब्लिक स्कूलों को मान्यता देने के लिए लागू किए गए नए नियमों से स्कूल संचालकों में रोष है। स्कूल संचालकों के अनुसार नए बाईलॉज के तहत स्कूल की मान्यता के लिए प्रदेश से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया है। मान्यता के नए नियमों के कारण स्कूलों को जिला व शासन स्तर पर काफी परेशानियां आ रही हैं। कई नियम तो बहुत विरोधाभासी हैं। केंद्र सरकार और प्रदेश के नियम एकदम विपरीत हैं। कौन से नियमों का पालन करें इसमें समस्या आ रही है। इन नियमों की मुश्किलों को सीबीएसई और प्रदेश सरकार दूर करे, नहीं तो स्कूल संचालक कोर्ट जाएंगे।
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बैठक में तय हुआ कि जल्द ही सीआईएस समूह को बढ़ाकर एक महासम्मेलन का आयोजन पूर्वी यूपी में होगा। सीआईएस 17 जिलों के 800 से अधिक स्कूलों के प्राचार्यों व संचालकों का संगठन है। इसका विस्तार करेंगे। बैठक में जिले स्तर पर सभी सदस्यों ने एसोसिएशन को और मजबूत बनाने का फैसला लिया। बैठक में सीआईएस के अध्यक्ष विशाल जैन, उपाध्यक्ष सुधीर जोशी, सचिव राहुल केसरवानी, उपसचिव जर्नादन गुप्ता, ट्रेजरार राहुल अग्रवाल, डॉ. अल्पना शर्मा सहित संजीव चौधरी, अमित चौधरी, विष्णु शरन, अभिनव सुशील, ओपी चौहान, अनिल अग्रवाल, विनय चौधरी, नीरज त्यागी, राजकुमार वर्मा, संतराम, अनुराग, अभिराग शर्मा सहित बुलंदशहर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, गजरौला, अलीगढ़, बरेली, मोदीनगर, हापुड़, गाजियाबाद, मुरादनगर से विभिन्न स्कूलों के प्रिसिंपल, संचालकों ने भाग लिया।

आरटीई में भत्ता बढ़ाने की उठाएंगे मांग
बैठक में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत भत्ता वृद्धि की बात पर विचार हुआ। सदस्यों ने कहा कि आरटीई के तहत स्कूलों को प्रति छात्र केवल 5400 रुपए भत्ता प्रतिवर्ष मिलता है जो बहुत कम है। आरटीई के प्रावधानों के तहत यह भत्ता प्रदेश में प्रतिछात्र हर प्रति वर्ष 39,982 रुपये या स्कूल की फीस जो कम हो वो मिलता है। जो बहुत कम राशि है। पूर्व में भी स्कूल संचालक सरकार से इस भत्ते को बढ़ाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन परिणाम नहीं मिला। देश में सबसे कम भत्ता केवल उप्र में दिया जाता है। सीआईएस की बैठक में तय हुआ कि प्रदेश सरकार से भत्ता राशि बढ़ाने की मांग रखी जाएगी। अगर सुनवाई नहीं हुई तो न्यायालय का सहारा लेंगे।
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पंजाब की तरह लागू हो स्कूल सुरक्षा अधिनियम
बैठक में स्कूल संचालकों व प्रिंसिपलों ने स्कूल संचालन में आ रही कठिनाईयों को उठाया। आए दिन अभिभावक, नेता स्कूलों में हंगामा करते हैं, स्टाफ से अभद्र व्यवहार करते हैं। ऐसी कई घटनाएं मेरठ में भी हो चुकी हैं। इसके कारण स्कूल संचालन में परेशानी आ रही है। बैठक में तय हुआ कि उत्तर प्रदेश में भी प्रदेश सरकार पंजाब की तरह स्कूल सुरक्षा अधिनियम लागू करे। पंजाब सरकार ने वर्ष 2017 में ही स्कूलों की सेफ्टी व सिक्योरिटी के लिए अधिनियम बना दिया। यूपी में सरकार इस तरह का कदम उठाए। इसके लिए सीआईएस का प्रतिनिधिमंडल जल्द उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा से मुलाकात करेगा।
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