केंद्र-यूपी सरकार के आगे मेडिकल कॉलेज की किरकिरी
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए सुपर स्पेसियलिटी अस्पताल के निर्धारित समय से शुरू न होने से मेडिकल कॉलेज की केंद्र और यूपी सरकार के आगे किरकिरी हो रही है। इस संबंध में लखनऊ महानिदेशालय ने स्पष्टीकरण मांगा है। प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने सुपर स्पेसियलिटी के दोनों नोडल अधिकारियों आर्थोपैडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेश्वर टांक और सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर राठी से जवाब तलब किया है। और दो दिन में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
सुपर स्पेसियलिटी अस्पताल का फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उद्घाटन करना था, लेकिन यह अस्पताल शुरू नहीं हो सका। इससे केंद्र और यूपी सरकार के सामने मेडिकल कॉलेज की छवि धूमिल हुई है। इसके शुरू न होने की कई वजह हैं। एक तो मेडिकल कॉलेज का विकिरण लाइसेंस सस्पेंड चल रहा है। इस कारण विकिरण वाली कोई भी मशीन यहां इंस्टाल नहीं की जा सकती। जिससे यहां एक्सरे, सीटी स्कैन और रेडियोथेरेपी आदि नहीं हो सकेंगी। दूसरी वजह सुपर स्पेसियलिटी के बराबर वाली कार्यशाला की बिल्डिंग को अभी तक नहीं तोड़ा जा सका है। इसके टूटने के बाद ही इसे फायर ब्रिगेड की एनओसी मिल पाएगी। तीसरी वजह यह है कि जिस तरह भवन को बनाया गया है, उससे मेडिकल प्रबंधन संतुष्ट नहीं हैं। ऑपरेशन थियेटर के बाहर वॉश वेसिन का न होना और चिकित्सा प्रभारी के लिए अलग से वॉशरूम की व्यवस्था भी नहीं की गई है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों का न मिलना भी इसके शुरू न होने की एक अहम वजह है।
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मेडिकल के पांच विभागाध्यक्षों से जवाब तलब
- एमबीबीएस की 50 सीटों पर संकट का मामला
- प्राचार्य ने जारी किया नोटिस, क्यों न की जाए कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों पर संकट का मामला और तूल पकड़ता जा रहा है। प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने इस संबंध में पांच विभागों के अध्यक्षों से जवाब तलब किया है। मेडिसिन सर्जरी, गायनिक बालरोग, गायनिक चर्मरोग, मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्षों से दो दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। नोटिस में लिया है, क्यों न आपके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की संस्तुति शासन को की जाए।
एमसीआई के मानकों पर खरे न उतरने के कारण मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वैसे तो कई वजह हैं, मगर मुख्य वजह मरीजों को अस्पताल में कम भर्ती करना माना गया है। बेडों के हिसाब से मरीजों को करीब 70 प्रतिशत भर्ती करना था, मगर किया गया सिर्फ 60 प्रतिशत। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पहले 100 सीटें थीं। इन्हें बढ़ाकर साल 2013 में 150 कर दिया गया था। एमसीआई की टीमें तभी से मेडिकल कॉलेज को मानकों पर परख रही हैं, लेकिन हर बार बढ़ाई गई सीटों को लेकर खामियां रह जाती हैं। अब 50 सीटें घटाएं जाने का संकट गहरा रहा है।
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वीडियो कांफ्रेसिंग में प्रमुख सचिव ने लगाई क्लास
सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग में प्रमुख सचिव रजनीश दुबे ने मेडिकल कॉलेज केजिम्मेदारों की क्लास लगाई। 150 करोड़ का सुपर स्पेसियलिटी अस्पताल शुरू न होने और एमबीबीएस की 50 सीटों पर संकट मामले में वह नाराज थे। वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद प्राचार्य ने दोनों में विभागाध्यक्षों और नोडल अफसरों को नोटिस जारी किए। इस कार्रवाई से मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों में खलबली मची है।