इस वर्ष के अंतिम माह तक मेरठ जिले में सीमेन आने की संभावना
अमर उजाला ब्यूरो
मवाना। अब बैलों के गले से घुंघरुओं की आवाज सुनाई देनी और मुश्किल हो जाएगी। दरअसल प्रदेश के सभी जिलों की नगर पंचायत एवं पालिका में गऊशाला खोलने के आदेश के बाद से जमीन का चिह्निकरण किया जा रहा है। गऊशाला खोलने का सरकार ने निर्णय तो ले लिया, लेकिन गाय की कमी उसके लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसकी भरपाई करने के लिए पशु वैज्ञानिकों ने नया सीमेन तैयार किया है, जिसको गाय के गर्भ में धारण कराने से 90 फीसदी बछिया का जन्म होगा।
पहले से ही अस्तित्व पर संकट
पुराने समय में किसान बैलों से खेती किया करते थे। बदलते परिवेश में बैलों की जगह ट्रैक्टर ने ले ली। आज कुछ चुनिंदा किसानों के पास ही बैल बचे हैं, लेकिन इस सीमेन के आने के बाद बैलों का बचा अस्तित्व और घट जाएगा।
यहां किया जा चुका है सफल परीक्षण
उत्तर प्रदेश के इटावा, बाराबंकी एवं लखीमपुर जिले में इस सीमेन का यहां सफल परीक्षण किया जा चुका है। तीन जिलों में सफलता मिलने के बाद अब इस सीमेन को मेरठ जिले में भी लाने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि इस वर्ष के अंत में यह सीमेन सभी पशु चिकित्सालयों में पहुंच जाएगा।
ऐसे तैयार होता है सीमेन
उच्चगुणवत्ता वाले सांड़ के सीमेन से फ्रो माइटोमीटर के जरिए बाइक्रोमोसोप को अलग किया जाता है। इससे गाय द्वारा 90 प्रतिशत बछिया को जन्म देने की संभावना प्रबल हो जाती है।
अधिकारी कहते हैं
सीमेन को मेरठ जिले के साथ उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी लाने के लिए उच्च स्तर पर विचार चल रहा है। अधिकारियों द्वारा इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। वर्ष के अंत तक यह सीमेन जिले में आने की संभावना है। -अरविंद कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी