फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोहर्रम आतंकवाद के खिलाफ आंदोलन का नाम-हजरत इमाम हुसैन के समय से जिंदा है,आतंकवाद-अब खात्मे की बारी

विज्ञापन
विज्ञापन
सरधना। खिर्वा जलालपुर गांव में मुहर्रम की दसवीं तारीख पर जहां एक तरफ मोहम्मद हुसैन के साथ उनके 72 साथियों को यजीद ने तड़पा-तड़पाकर मार डाला गया था। उस मंजर को सुनाते हुए मौलानाओं ने आज विश्व के लिए खतरा बने आतंकवाद पर भी तकरीर की। बताया कि यह आतंकवाद हजरत इमाम हुसैन के समय से चला आ रहा है। हजरत इमाम हुसैन के नवासे कासिम और हजरत इमाम हुसैन के साथ उनके 72 साथियों को यजीद के द्वारा कर्बला के मैदान में आतंकवादियों जैसा बर्ताव करते हुए मारा। असल में कुरआन व गीता में आतंकवाद के लिए जगह नहीं है। कुछ हजरत इमाम हुसैन के समय और आज भी आतंकवाद को जिंदा रखे हुए हैं। अब समय आ गया है कि कुरआन और गीता को मानने वाले एकजुट होकर आतंकवाद के सफाए के लिये एकजुट हों। जम्मू कश्मीर समेत देश की सीमा पर वही हालात बने हैं। फर्क बस इतना है कि तब इमाम हुसैन को कर्बला के मैदान में बर्बरता पूर्वक मारा गया आज भी देश की सीमा के अंदर कुछ ऐसे ही हालात हैं। इस बार खिर्वा में कमेटी द्वारा बैनर लिखवाकर संदेश दिया।
विज्ञापन

कमेटी के सदर मुनाजिर अली ने बताया कि इमाम हुसैन को कर्बला में जिसने मारा वह कोई इंसान नहीं हो सकते वह आतंवादी ही थे। आतंकवाद आज की देन नहीं है वह हजरत इमाम हुसैन के समय से चला आ रहा भयानक नासूर है। से समूचे विश्व में कुचलने की जरूरत है। यहां कमेटी सदस्य अफसर अब्बास जैदी, जमीर अब्बास जैदी, साजिद हुसैन जैदी, मासूम जैदी ने भी आतंकवाद के खात्मे के लिए कठोर कदम उठाने की वकालत की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें