अलम का जुलूस निकाला
सरधना। नगर व देहात क्षेत्र के खिर्वा गांव में मंगलवार को मोहर्रम की सातवीं तारीख पर इमाम हुसैन के नवासे जनाबे कासिम की शहादत को याद कर सोगवारों ने अलम का जुलूस निकाला। पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी रहे। खिर्वा में सोगवारों ने अंगारों पर चलकर मातम किया और इस दौरान हुसैनी चौक पर सामुहिक मातम किया। सोगवारों ने जंजीरों व छुरियों से मातम किया, बच्चों ने भी बड़ों के साथ मिलकर मातम किया। सोगवार जनाबे कासिम की शहादत को याद करके फफक-फफक कर रो पड़े। इस दौरान महिलाएं जनाबे कासिम का अलम देेख भी फूट-फूटकर रोई।
खिर्वा जलालपुर में मोहर्रम की सातवीं तारीख को मोहम्मद इमाम हुसैन के नवासे जनाबे कासिम की शहादत पर मंगलवार को सोगवारों ने जंजीरों व छुरियों से मातम किया और खुद को या हुसैन-या हुसैन की सदाओं के बीच लहूलुहान कर लिया। जुलूस में इमाम हुसैन के नवासे जनाबे कासिम को याद करके सोगवार फफक-फफक कर रो पड़े। खिर्वा जलालपुर गांव के जुलूस में बाबू जी, लंबरदार, फतेह मोहम्मद, जहरा के इमामबाड़े से अलम निकाले गए। जुलूस गांव में घूमने के बाद हुसैनी चौक पर पहुंचा। सोगवारों ने जमकर मातम किया। जुलूस में सोगवार इमाम हुसैन को याद करके फफक-फफक कर रो रहे थे। सोगवारों ने मातम करके खुद को लहूलुहान कर लिया था। मौलाना ने जनाब हजरत कासिम की शाहदत को बयान किया। साथ ही बताया कि मोहर्रम की सातवीं तारीख को यजीद ने इमाम हुसैन के परिवार के लिए पानी बंद कर दिया था। वहीं सरधना नगर के स्वामियान मोहल्ला स्थित इमामबाड़ा नक्कालान से भी अलम का जुलूस निकाला गया। अलम नगर में चौक बाजार, मालियान, भाटवाडा ऊंचापुर, बैरून सराय, भूलरिया आदि से होते हुए आजादनगर मोहल्ले में जाकर संपन्न हुए। पूर्व चेयरमैन असद गालिब, ऐनुद्दीन शाह, नसरुद्दीन मलिक, मंजूर मलिक, पंकज जैन, अब्दुल्ला, रहमान आदि मौजूद रहे। इंस्पेक्टर प्रशांत कपिल जुलूस के साथ पुलिस फोर्स के साथ मौजूद रहे।
अलम के जुलूस में छुरियों और जंजीरों से किया मातम
जानीखुर्द। गांव रसूलपुर धौलडी में मोहर्रम की सात तारीख को जुलूस ए अलम बरामद हुआ। जुलूस में सोगवारों ने छुरियों और जंजीरों से मातम किया। मातम पुर्सी के दौरान सोगवार लहूलुहान हो गए। इससे पूर्व गांव के इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर जारी रहा।
गांव रसूलपुर धौलड़ी में मोहर्रम की सातवीं तारीख को दिवान खाने से हजरत इमाम के भतीजे कासिम की शहादत की याद में जुलूस ए अलम बरामद हुआ। जुलूस गांव के मुख्य मार्गों से होता हुआ वापस दीवान खाने पर आकर समाप्त हुआ। जुलूस में कई अंजुमनों ने नोहे ख्वानी व मातपुर्सी की। जुलूस में शामिल सोगवारों ने शहिदाने करबला की याद में शेखायान और राजपूतान मस्जिद के पास छुरियों और जंजीरों से मातम करते हुए अपने आप को लहूलुहान कर लिया। मातमी जुलूस देखने के लिए धौलड़ी और आसपास के गावों के हजारों लोग जमा हुए। इससे पूर्व सुबह के समय दीवान खाने में हुई मजलिस में जनाब ए कासिम की शहादत बयां की तो सोगवार रो पडें। जलूस ए अलम के दौरान भारी पुलिस बल मौजूद रहा।
वहीं मवाना में मंगलवार को मोहर्रम की सात तारीख को शबीहे जुल जनाह जुलूस की शक्ल में इमाम बारगाह तिहाई से बरामद हुई। आज पहली मजलिस इमाम बारगाह दरबारे हुसैनी में सुबह आठ बजे शुरू हुई। जिसमें मिंबर से आली जनाब मौलाना मोहम्मद अली ने खिताब किया। यहां के बाद एक मजलिस इमाम बारगाह कोटला में हुई। जहां पर मिंबर से आली जनाब मौलाना अजहर अब्बास इमाम जुमावल जमात ने खिताब किया। इसके बाद एक मजलिस इमाम बारगाह खैरात अली में जिसमें बाद मजलिस शबीहे ताबूत हजरत कासिम बरामद हुआ। यहां पर मिंबर से आली जनाब फिरदौस मेहंदी ने खिताब किया।
बादे नमाज जोहरैन इमाम बारगाह हजरत अबूतालिब मोहल्ला तिहाई में बड़ी मजलिस हुई। यहां पर मिम्बर से आली जनाब मौलाना जाफर रिजवी ने खिताब किया। शबीहे जुलजनाह जुलूस की शक्ल में गश्त करते हुए देर रात को इसी इमाम बारगाह पर जाकर खत्म हुआ। जुलूस में सबसे आगे अंजूमने हैदर खैरात अली कोटला के मातमदार मातमपुर्सी कर रहे थे। इस अंजुमन में नोहाख्वानी रजी हैदर, सज्जाद हैदर, गाजी जैदी आदि ने की। इस अंजुमन के पीछे अंजुमने दस्त ए अब्बासिया के मातमदार मातमपुर्सी कर रहे थे। इनके अंजुमने हुसैनी के तिहाई के रजाकार मातमपुर्सी कर रहे थे। इनके पीछे शबीहे जुलजनाह था। जुलूस इमाम बारगाह से शुरू होकर निर्धारित मार्गों को होता हुआ इमाम बारगाह तिहाई पर जाकर खत्म हुआ। जुलूस में मवाना के अलावा नंगला चांद, सैफपुर, बडा गांव, भैंसा, महलका आदि के मोमनीन ने शिरकत की।