हस्तिनापुर। श्री दिगम्बर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के मल्लिनाथ भगवान के समवशरण में दशलक्षण महापर्व के द्वितीय दिवस पर मुख्य वेदी में विराजमान त्रय तीर्थंकरों का जलाभिषेक किया गया।
तदोपरांत विधान की मांगलिक क्रियाएं पं. आशीष जैन शास्त्री द्वारा प्रारंभ की गई। शांतिधारा की बोली क्षेत्र के सदस्य विजय जैन ने प्रारंभ की। शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रेमचंद जैन, कांता जैन, राजीव जैन, प्रदीप और संदीप जैन को तथा सहयोग सौधर्म इंद्र मुकेश जैन ने किया। समवशरण महामंडल विधान के मध्य मुनि श्री 108 भाव भूषण महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म पर मंगलमय प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि मान, घमंड, अभिमान को छोड़ो क्योंकि यह नीच गति में ले जाने वाला है। मान को महान विष की संज्ञा दी गई। जिस प्रकार से विष व्यक्ति का सर्वनाश कर देता है उसी प्रकार से मान (घमंड) करने वाले का भी सर्वनाश हो जाता है। चाहे हम कितने ही धनवान, ज्ञानवान, बलवान हो परंतु इसका घमंड न करें। अभिमान पतन का कारण है। यह इंसान की सुख, शांति भंग कर देता है।
रावण, कौरव, कंस बहुत शक्तिशाली, बुद्धिमान थे। इनके पतन का कारण इनका अहम रहा है। घमंड के वशीभूत हो करके इनका सर्वनाश हुआ है। जीवन में कभी घमंड नहीं करना हमेशा विनयशील बने रहना। विनयवान को ही विद्या आती है और ऐसे भक्तजनों को जीवन में यश, कीर्ति, पद, प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। इसलिए उत्तम मार्दव धर्म स्वीकार कर आत्म कल्याण करें। समवशरण महामंडल विधान में आज नित्यनियम पूजन के साथ विधान की समुच्य पूजन एवं समवशरण में स्थित मान स्तंभ में विराजमान अरिहंतों की एवं सप्त भूमि की पूजन कर पुण्य का संचय किया। विधान में उपस्थित आरडी जैन, विनोद जैन, श्रीपाल जैन, सुरेंद्र जैन, अनिल जैन, प्रमोद जैन, संजय जैन, दिगम्बर जैन, धर्मचंद जैन, विनोद जैन, महेन्द्र जैन आदि ने मंडल पर अर्घ्य समर्पित पुण्य का संचय किया। बीच-बीच में विधान में उपस्थित भक्तों ने पूर्ण भक्ति के साथ भगवान मल्लिनाथ का गुणगान करते हुए वातावरण को गुंजायमान कर दिया। सायंकालीन बेला में सभी श्रद्धालुओं ने संगीतमय आरती की तत्पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। जिसमें उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के सभी बच्चोें ने भाग लिया। कार्यक्रम के पुरस्कार श्रीपाल जैन, उमा जैन द्वारा प्रदत्त किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुकेश जैन महाप्रबंधक, अशोक जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कमल, मणीचंद, सुदीप ने सहयोग किया।