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बचपन से ही अहवर को लगा शूटिंग का शौक

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लावड़। दक्षिण कोरिया से देश के लिए सोना लेकर लौटे अहबर रिजवी को बचपन से ही शूटिंग का शौक था। उसके इस जज्बे को देख परिजनों ने भी उसके आड़े कोई समस्या नहीं आने दी। महल गांव निवासी 16 वर्षीय अहबर रिजवी जिले में सबसे कम उम्र में सबसे अधिक मेडल लाने वाला शूटर है। अमर उजाला से खास बातचीत में अहबर के पिता मोहम्मद आसिफ ने बताया कि जब अहबर छोटा था तो उसके भाई खेलने जाते थे तो अहबर भी जिद किया करता था कि वह भी खेलने जाएगा। अहबर रिजवी ने बताया कि उसकी इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ उसके चाचा रईयान का है। वह भी निशानेबाजी करते हैं। जब अहबर बाहर शूटिंग में हिस्सा लेने जाता था तो उस पर अपनी बंदूक का लाइसेंस नहीं था, जिस कारण वह अपने चाचा की बंदूक से ही प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेता था। अहबर रिजवी ने कहा कि आज मेरठ में शूटिंग का क्रेज है। इन प्रतियोगिताओं में मेरठ के निशानेबाजों ने दिखा दिया कि निशानेबाजी में भी कैरियर है। उन्होंने सरकार से देहात क्षेत्र में सरकारी स्टेडियम खोले जाने की मांग की। जिससे अन्य बच्चे भी स्टेडियम में अभ्यास कर सकें। अहबर ने कहा कि अब उसकी अगली तैयारी ओलंपिक में जाने की है। जिससे वह दोबारा देश के लिए सोना ला सकें।
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