मवाना। कोतवाली इन दिनों स्टाफ की कमी से जूझ रही है। इसके चलते बवाल होने की आशंका के मद्देनजर दूसरे थानों की फोर्स की सहायता लेनी पड़ रही है। दरअसल कोतवाली में तैनात कुछ थानेदारों पर अधिकारियों की गाज गिरी तो कुछ राजनीति का शिकार हो गए। कुछ दरोगा, सिपाही व इंस्पेक्टर ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने स्वयं स्थानांतरण करा लिया। इस प्रकार लगातार घट रहे स्टाफ के कारण क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।
मवाना कोतवाली की बात करें तो यहां स्टाफ की कमी भी पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई है। लगातार बढ़ रही वारदतों के बावजूद अधिकारी स्टाफ पूरा करने की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिस कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पिछले तीन महीने में थानेदार एवं दरोगाओं के यहां से जाने की बात करें तो लंबी फेहरिस्त है। तत्कालीन थाना प्रभारी बृजेश कुशवाहा लाइन हाजिर, डीजीपी के एक थाने में चार इंस्पेक्टर के आदेश के बाद एसओ धर्मेंद्र का हस्तिनापुर स्थानांतरण, ऑडियो वायरल करने के मामले में इंस्पेक्टर एमपी सिंह लाइन हाजिर, दरोगा राजकुमार गौतम लाइन हाजिर, एसएसआई करतार सिंह का फलावदा एसओ पद पर स्थानांतरण, इंस्पेक्टर क्राइम देवेश शर्मा ने स्वयं स्थानांतरण करा लिया। दरोगा राजदीप पूनिया, संजय अत्री, प्रदीप एवं सुखवीर का स्थानांतरण, तथा दरोगा श्योदान सिंह यादव लाइन हाजिर हुए। लगातार स्टाफ की कमी भी मवाना पुलिस के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। इसके बावजूद स्टाफ की भरपाई नहीं हो सकी है। इस बाबत एसपी देहात राजेश कुमार का कहना है कि जिले में ही फोर्स की कमी है। इसे जल्द पूरा किया जाएगा।
मुख्य आरोपी
तबादलों और लाइन हाजिर होने से बढ़ रहा टोटा
दूसरे थाने के फोर्स की समय-समय पर लेनी पड़ रही मदद