फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महंगाई पर भारी आस्था, कांवड़ सजाने में खर्च हो रहे 8 से 10 लाख रुपये

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

महंगाई पर भारी आस्था, कांवड़ सजाने में खर्च हो रहे 8 से 10 लाख रुपये
मेरठ/मोदीपुरम। आस्था में सजावट का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि हाईवे पर जहां भी नजर जाती है शिवभक्तों की गूंज ही सुनाई पड़ रही है। शिवभक्तों ने कांवड़ को सजाने में महंगाई को दरकिनार किया है। झांकी वाली कांवड़ में शिवभक्त लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। झांकी की ऐसी सुंदर कांवड़ कि देखकर मन मोह लें।
सावन माह की शिवरात्रि के लिए दूरदराज से शिवभक्त गंगा से जल लाकर मंदिरों में लाकर जलाभिषेक करते हैं। हरिद्वार से शिवभक्त जल के साथ कांवड़ भी सजवाते हैं। कांवड़ में खड़ी कांवड़, झूला कांवड़, डाक कांवड़, कलश कांवड़, झांकी कांवड़ लाते हैं। इस बार कांवड़ की आस्था में तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। शिव भक्त अपनी कांवड़ को जहां इलेक्ट्रोनिक्स लाइटों से सजा कर ला रहे हैं वहीं अत्याधुनिक साउंड सिस्टम और डीजे भी कांवड़ यात्रा का अलग स्वरूप तैयार कर रहे है।
विज्ञापन

झांकी वाली कांवड़ ला रहे शिव भक्तों में अपनी कांवड़ को दूसरों की कांवड़ से अधिक सुंदर और आकर्षक बनाने की होड़ लगी है। कांवड़ आकर्षण का केंद्र बने इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली निवासी रोहित ने बताया कि उनकी टोली जो कांवड़ ला रही है उसमें कंप्यूटराइज्ड लाइटिंग लगाई गई है। ये लाइटें साउंड सिस्टम से जुड़ी हैं जो आवाज के साथ अपनी रंग बिरंगी रोशनी बिखेरती है। कांवड़ तैयार करने में करीब सात लाख रुपये खर्च हुए हैं। पश्चिमी दिल्ली निवासी राजू और सुंदर ने भी अपनी कांवड़ को सजाने में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी कांवड़ एलईडी लाइटों से सजायी हुई है। राजू के मुताबिक उनकी टोली दिन में आराम करती है और रात में सफर पूरा करती है। क्योंकि उनकी कांवड़ की सजावट रात में ही आकर्षण का केंद्र रहती है इसलिए वह रात में ही पैदल यात्रा करते हैं। राजू के मुताबिक उनकी कांवड़ में सोलर एलईडी लाइटें लगी हैं। दिन में सोलर बैटरी चार्ज कर ली जाती हैं जो रात में अपना काम करती हैं। बताया गया कि कांवड़ में केवल लाइटिंग पर ही एक लाख से अधिक रुपये खर्च हुए हैं। दिल्ली के खिचड़ीपुर निवासी राजेश भी अपनी टीम के साथ हरिद्वार से झांकी कांवड़ ला रहे हैं उन्होंने बताया कि करीब दो लाख रुपये में झांकी सजवाई गई हैं। दिल्ली के दक्षिणपुरी निवासी गोविंद और अमित ने बताया कि शनिवार की तड़के वह झांकी कांवड़ लेकर चले थे। 1.4 लाख रुपये में उन्होंने कांवड़ सजवाई थी।
गुरुग्राम निवासी रोहिताश्व ने बताया कि ढाई लाख में सजावट का खर्च आया है, जबकि एक लाख रुपये से अधिक खर्चा कांवड़ लाने में आ जाएगा। पलवल निवासी सुरेश ने बताया कि गांव के 26 शिवभक्तों की टीम एक साथ कांवड़ ला रहे हैं। यह उनकी पांचवी कांवड़ है और चार लाख रुपये खर्च का तीन दिन में हरिद्वार में कांवड़ सजवाई थी।
10 लाख रुपये तक हो रहा है खर्च
मोदीपुरम। फरीदाबाद निवासी अंकुश चौधरी का कहना है कि भगवान भोले नाथ के नाम पर क्या खर्च हो रहा है, इसका कोई हिसाब नहीं है। भगवान भोलेनाथ ही देने वाले है और वही लेने वाले है। पिछले आठ साल से वह बड़ी विशाल कांवड़ ला रहे है। हर साल खर्च भी बढ़ रहा है, इस साल का खर्च अभी तक जोड़ा नहीं है, लेकिन दस लाख रुपये से कम नहीं आ रहा है।
धूप बत्ती कर उठाया जाता है जल
गंगोत्री, उत्तरकाशी, और गोमुख से सिर्फ गंगा जल ही लाया जाता है। जल उठाते समय जिस भी मंदिर में जलाभिषेक करना होता है वहां के मंदिर का नाम लेकर ही जल उठाया जाता है। जल उठाते समय शिवभक्त धूपबत्ती से जल की पूजा करते हैं। उसके बाद जल को जमीन पर नहीं रखा जाता। खाना खाने, सोने और रात्रि विश्राम के बाद जब भी जल उठाया जाता है, उससे पहले धूप जलाकर भोलेनाथ की पूजा की जाती है।
विज्ञापन

51 लीटर तक भी लाया जा रहा गंगाजल
जमीन पर सिर्फ गंगाजल के कलश ही रखे जाते हैं। इनके अलावा किसी भी प्रकार की कांवड़ में गंगाजल को जमीन पर नहीं रखा जाता। शिवभक्त कलश में 51 लीटर तक भी जल ला रहे हैं। दिल्ली के पीतमपुरा निवासी सोनवीर छह कलश में 51 लीटर जल ला रहे हैं। 11 लीटर, 21 लीटर, और 31 लीटर भी जल भरकर कलश में ला रहे हैं।


खास बातें:
- अत्याधुनिक साउंड सिस्टम लगाकर सजा रहे कांवड़
- रात में आकर्षण का केंद्र बनती है झाकियां, दिन की बजाय रात में करते है सफर,
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें