- कृषि विवि देगा प्रशिक्षण, किसानों को कर रहा है जागरुक
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मोहित कुमार------
मोदीपुरम। वेस्ट यूपी में किसानों को अब रेशम कीट पालन की ओर भी आकर्षित किया जाएगा। इसके लिए सरदार वल्लभ भाई कृषि विवि अपने यहां रेशम कीट पालन की जानकारी किसानों को दे रहा है। ताकि वह रेशम कीट पालन कर आमदनी को बढ़ा सकें।
कृषि विवि की ओर से रेशम कीट पालन अपनाने के लिए छोटे जोत वाले किसानों को विशेष रूप से ट्रेनिंग देने की योजना तैयार की गई है। रेशम कीट पालन योजना पर काम कर रहे विवि के डॉ. हेम सिंह का कहना है कि रेशम कीट पालन करने से छोटे किसानों की औसत आय में निश्चित वृद्धि होगी। इसके लिए शहतूत की खेती जरूरी है। यदि किसी किसान के पास दो बीघा जमीन है तो वह भी आराम से रेशम कीट पालन कर सकता है। रेशम कीट पालन के लिए एक साल में पूरी पत्ती तैयार हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस तरह का प्रयोग विवि में पहली बार हो रहा है।
सफेद और पीले कलर की होती है प्रजाति
डॉ. हेम सिंह ने बताया कि दो तरह की प्रजातियों का कीट पालन किया जाता है। इसमें एक द्वि प्रजनन और दूसरी बहु प्रजनन प्रजाति है। द्वि प्रजनन प्रजाति की कीमत बाजार में 500 से 700 रुपये किलो है, जबकि बहु प्रजनन प्रजाति की कीमत 400 से 500 रुपये किलो है। जिन प्रजातियों के माध्यम से रेशम कीट पालन किया जाएगा उनमें शहतूत की एस14-6 एस-1635,एस-10 टीआर-10 और कनवा- मुख्य है।
ऐसे करें कीट पालन
डॉ. हेम सिंह के अनुसार शहतूत के एक मीटर पौधे को पौधे की दूरी और लाइन को लाइन की दूरी से लगाए। छह माह में इसमें पत्तियां आ जाती है। जिसके बाद कीट पालन शुरू किया जा सकता है। एक साल में पूरी पत्ती आ जाती है। किसान इसे दो बीघा में भी शुरू कर सकते है। कीड़े की प्रजाति एनवी-4 डीटू एसएक्स-6 निस्तारी को प्रयोग में लाया जाता है। पश्चिमी यूपी में इसमें व्यापार की अपार संभावनाए बढ़ती जा रही है।
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किसान हित में कर रहे काम
कृषि विवि के वैज्ञानिक किसानों के हित में काम कर रहे है। वेस्ट यूपी में रेशम कीट उत्पादन की अपार संभावनाएं है, इससे किसानों को जोड़ा जा रहा है। रेशम कीट पालन के माध्यम से किसान अपनी कम लागत के साथ आय बढ़ा सकते है। -डॉ. गया प्रसाद, कुलपति