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थाने में भिड़े थाना प्रभारी व इंस्पेक्टर प्रशासनिक

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थाना प्रभारी से लाइन में भेजने की बात कहते हुए बाइक लेकर थाने से चले गए
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अमर उजाला ब्यूरो
मवाना। प्रदेश के डीजीपी का थानों में चार इंस्पेक्टरों की तैनाती का प्रयोग विफल होता दिखाई दे रहा है। शनिवार को मवाना थाने में प्रभारी व इंस्पेक्टर प्रशासनिक में जमकर नोकझोंक हुई। इंस्पेक्टर प्रशासनिक ने थाने में अन्य शिकायत सुनने से इनकार कर दिया। इस पर थाना प्रभारी की शिकायत करने की चेतावनी पर वह आग बबूला होकर थाने से चले गए।
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बताते चलें कि जनता को समय से न्याय मिल सके और अपराध में भी कमी आए। इसके लिए प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने लगभग एक माह पहले थानों में चार इंस्पेक्टरों की तैनाती का आदेश जारी किया था। पहले से ही थानों में बैठने की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में चार-चार इंस्पेक्टरों की तैनाती के बाद व्यवस्था और बिगड़ती नजर आ रही है। लगभग तीन दिन पहले मवाना थाने में इंस्पेक्टर क्राइम के बाद इंस्पेक्टर प्रशासनिक प्रदीप ढोंडियाल की तैनाती की गई है। पिछले तीन दिनों से वह इधर-उधर बैठकर ही समय पूरा कर रहे थे। शनिवार को थाना दिवस के दौरान भीड़ होने पर थाना प्रभारी एमपी सिंह ने उन्हें इधर उधर बैठने की बजाए इंस्पेक्टर क्राइम के बराबर में बैठकर जनता की समस्या सुनने व कुछ विवेचना पूरी करने के लिए कहा। इस पर उन्होंने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया। इंस्पेक्टर प्रशासनिक ने कहा कि वह केवल प्रशासनिक समस्या ही सुनेेंगे। इस पर दोनों में जमकर बहस हुई। मामला इतना बढ़ गया कि इंस्पेक्टर प्रशासनिक ने थाना प्रभारी से कह दिया कि वह उन्हें लाइन में भिजवा दें। काफी बहस के बाद इंस्पेक्टर प्रशासनिक अपनी बाइक उठाकर रवाना हो गए। दोनों में बहस के दौरान थाने में मौजूद जनता यह सब देख रही थी। जब थाने में पुलिस ही अनुशासन नहीं बरतेगी तो जनता से पुलिस क्या उम्मीद रख सकती है। हालांकि इंस्पेक्टर प्रशासनिक कुछ देर बाद ही थाने में लौट आए। इस संबंध में एसपी देहात राजेश कुमार का कहना है कि मामले की जांच कराई जायेगी। पुलिस ही यदि अनुशासन तोड़ेगी तो जनता पर इसका बुरा असर पड़ेगा।
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