बहसूमा। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के निर्देश पर मुंबई और मेरठ की संयुक्त टीम एनएच 119 पर फोर लेन बाईपास सर्वे करने के लिए बृहस्पतिवार को बहसूमा के मौड़ खुर्द पहुंची। अधिकारियों के सामने बाईपास निकालने को लेकर ग्रामीण दो फाड़ हो गए। देखते ही देखते ग्रामीणों में कई बार नोकझोंक हुई। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत किया। इसके बाद पक्ष-विपक्ष के एक-एक व्यक्ति को बुलाकर बयान दर्ज किए। ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष कई बार हंगामा भी किया।
मेरठ-पौड़ी राजमार्ग एनएच 119 फोर लेन बाईपास निकालने के लिए जारी अधिसूचना से क्षेत्रीय लोगों में हड़कंप मच गया। दो दिसंबर 2017 को जारी अधिसूचना एनएच 119 बहसूमा से बसी वीरान, फतेहपुर हंसापुर, बहसूमा, सदरपुर, मौड़ खुर्द से होते हुए बाईपास का सर्वे कर किसानों के नाम की भूमि भी बता दी गई थी। सर्वे का ग्रामीणों को पता चला तो सदरपुर और मौड़ खुर्द के कुछ ग्रामीण क्षेत्रीय सांसद कुंवर भारतेंदु के साथ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिले। इस पर उन्होंने पुन: सर्वे कराकर बहसूमा, बसी विरान, फतेहपुर हसंापुर, मौड़ कला, मोहम्मदपुर शकिस्त को होते हुए रामराज को सर्वे कराकर 24 मई 2018 को अधिसूचना जारी करा दी। इसकी जानकारी मौड़ खुर्द के प्रधान समेत अन्य लोगों को हुई तो उन्होंने परिवहन मंत्रालय से शिकायत कर बाईपास का पुन: सर्वे के निर्देश करा लिये।
परिवहन मंत्री के निर्देश पर मुंबई से रिटायर अधिकारी एसएस मोमिन, मेरठ प्रोजेक्ट डायरेक्टर दिनेश कुमार चतुर्वेदी, इंजीनियर आयुष कुमार की टीम बृहस्पतिवार दोपहर को मौड़ खुर्द गांव पहुंची। अधिकारी प्रांरभ में मुख्य रोड पर एक किसान के घेर में लोगों से बाईपास निकालने के बारे में जानकारी ले रहे थे। यहां प्रधान धर्मेंद्र फौजी के समर्थकों ने सार्वजनिक स्थल पर वार्ता करने की बात कही।
इस पर टीम मौड़ खुर्द स्थित शिव मंदिर प्रांगण पहुंची और लोगों के तर्क सुने। इसी दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने हंगामा कर दिया। ग्रामीण दो धड़ों में बंट गए। यहां नोकझोंक और तनातनी बढ़ गई। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने से माहौल गर्मा गया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों को जैसे-तैसे शांत किया। बाईपास के पक्ष में सूरज, सोनवीर, मदनपाल सिंह, काले, सत्यवीर और नवीन का तर्क है कि आए दिन होने वाले हादसे से बचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त सड़क किनारे बसे ग्रामीणों के मकान बच जाएंगे। वहीं, दूसरे पक्ष ग्राम प्रधान धर्मेद्र फौजी, हरेंद्र सिंह, उपेंद्र सिंह, वीरेंद्र, इरशाद, मकसूद कहना है कि बाईपास निकालने से 33 हेक्टेयर भूमि कम पड़ रही है। वहीं, बाईपास नहीं निकालने से 7.5 हेक्टयेर भूमि का अधिग्रहण पर्याप्त है। इसमें डेढ़ हेक्टयर भूमि बंजर, तालाब, सरकारी और अवैध कब्जे हैं। जनहित में सरकार को कई सौ करोड़ का लाभ मिलेगा। सड़क किनारे बसे मकान मालिक सरकार हित में बिना मुआवजे को देने को तैयार हैं। यदि किसी निर्धन परिवार को भूमि की आवश्यकता पड़ती है तो उसे ग्राम प्रधान की ओर से मकान एवं जमीन दे दी जाएगी। बाईपास निकालने से गांव की रौनक खत्म हो जायेगी।
ग्रामीणों ने अपने-अपने पक्ष में दस्तावेज भी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने शीघ्र ही समाधान निकालने का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त बहसूमा के लोगों ने भी अधिकारियों की टीम से बाईपास का विरोध करते हुए कहा कि जब देवबंद में छह किलोमीटर लंबा ओवरब्रिज बन सकता है तो बहसूमा में 600 मीटर का ओवरब्रिज क्यों नहीं बन सकता है। इसके लिए सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का लाभ मिलेगा। सरकार के नुमांइदे को सरकार हित में कार्य कर राजस्व बचाना चाहिए।
इस सबंध में ग्राम प्रधान मौड़ खुर्द धर्मेंद्र फौजी का कहना है कि उन्हें बाईपास रोकने के लिए चाहे जितने संघर्ष करना पड़े। वे जनहित में वर्तमान में गुजर रहे हाईवे का ही चौड़ीकरण कराकर दम लेंगे।
मेरठ-पौड़ी राजमार्ग पर बाईपास को लेकर ग्रामीण दो धड़ों में बंटे, हंगामा
पुलिस ने पहुंचकर ग्रामीणों को किसी तरह शांत कराया
नौकर को सांप ने डसा मौत
बहसूमा। ग्राम रहावती निवासी किसान के नौकर को बुधवार रात खेत में डस लिया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
बहसूमा के रहावती निवासी किसान गुरुदेव ने बताया कि उसके पास बीते दो वर्ष से बलबीर पुत्र अज्ञात खेत की किसानी के लिए कार्य करता था। वह बुधवार को गन्ने के खेत में पानी लगाने गया था। खेत में किसी जहरीले सर्प ने डस लिया। नौकर के मुंह से झाग निकलने प्रंारभ हो गए। उन्होंने आनन-फानन में रहावती स्थित प्राइवेट चिकित्सक को दिखाया। यहां पर उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया।
हल्की बारिश से मौसम सुहावना
बहसूमा। बृहस्पतिवार दोपहर को बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया। बारिश से लोगों को गर्मी से निजात मिली। वहीं, मौसम को खुशनुमा बना दिया। बारिश का किसानों को बेसब्री से इंतजार है, लेकिन बदरा आसमान में आते हैं और बिन बरसे निकल जाते हैं।