सरधना। झिटकरी गांव में रास्ते पर जलभराव की समस्या को लेकर जहां एक तरफ ग्रामीणों और एक किसान के बीच नाला निर्माण को लेकर विवाद चल रहा है। इस मामले में दोनों पक्ष तहसील से लेकर कमिश्नरी तक शिकायत कर चुके हैं। मंडलायुक्त द्वारा किसान एवं ग्रामीणों के पक्ष में दो अलग-अलग आदेश जारी किए हैं। इसको लेकर तहसील स्तर के अधिकारी खासे परेशान हैं।
ब्लॉक के झिटकरी गांव में बस्ती के दूषित पानी की निकासी को लेकर नाला निर्माण पर विवाद जारी है। वह थमता नजर नहीं आ रहा है। जिस जगह कई वर्षों से गांव की बस्ती के पानी की निकासी होती थी। इस पर किसान सुरेशदत्त शर्मा पक्ष का कहना है कि दूषित पानी खेत में भर जाने से फसल को नुकसान पहुंचता है। किसान एवं ग्रामीणों के बीच विवाद बढ़ा तो सुरेश दत्त शर्मा पक्ष ने तहसील में भूमि के अभिलेख देखे। जिसमें चार मीटर की चकरोड खेत में दर्शा रखी है, लेकिन नाली नहीं है। इसके बाद मुनेश शर्मा पक्ष द्वारा नाला बंद कर दिया गया। इसका ग्रामीणों ने विरोध किया और पानी को दोबारा खेत में चालू कर दिया। किसान सुरेशदत्त शर्मा पक्ष द्वारा इस मामले में सिविल न्यायालय जूनियर डिविजन सरधना के यहां वाद दायर किया। मामला बढ़ा तो एसडीएम राकेश कुमार सिंह और बीडीओ गांव पहुंचे और मामले की जानकारी ली। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने से अधिकारी अपने स्तर से कार्रवाई करने से बचते रहे। सुरेशदत्त शर्मा पक्ष इस मामले में उच्च न्यायालय तक चला गया। वहीं, सुरेशदत्त शर्मा पक्ष मेरठ जाकर मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से मिलकर अपना पक्ष रख चुका है। इस मामले में मंडलायुक्त ने एसडीएम सरधना को लिखा कि वह मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण करें और उच्च न्यायालय के अनुरूप समस्या का समाधान कराएं। जिनके रास्ते पर कब्जे हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें। वहीं, एफआईआर दर्ज कराएं। एसडीएम ने भी बीडीओ को आदेश जारी कर कार्रवाई के लिए लिखा। इस मामले में 7 जून को ग्रामीणों का पक्ष सुरेशदत्त शर्मा पक्ष के खिलाफ मंडलायुक्त से मिला और जलभराव की गंभीर समस्या से अवगत कराया। जिस पर मंडलायुक्त ने पत्र जारी कर एसडीएम को जलभराव का हल निकालने के लिए आदेशित किया। बीच में रुके नाले को रास्ते की जमीन पर बनवाकर निकासी करा दें। फिलहाल कच्चा नाला खुदवायें एवं इसके बाद पक्का नाले का प्रस्ताव भेजें। इस संबंध में अनुपालन कराए। आख्या 15 जून तक कार्यालय को उपलब्ध कराएं। इसमें ग्रामीण स्वयं सहयोग देंगे। मंडलायुक्त द्वारा जारी किए दो अलग-अलग आदेश को लेकर तहसील प्रशासन एवं ब्लॉक प्रशासन खासा परेशान हैं।
मुख्य बातें
मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे