मेरठ। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री ने सस्ते स्टेंट और घुटना प्रत्यारोपण का लाभ लेने वालों से संवाद किया। साथ ही केंद्र द्वारा चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं का हाल जाना। उन्होंने कहा कि सरकार सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि मेरठ वालों से प्रधानमंत्री का सीधा संवाद नहीं हो सका। इसके अलावा स्टेंट और घुटना प्रत्यारोपण कराने वाले जिन 14 लाभार्थियों की सूची लखनऊ से स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई थी, वह वीडियो कांफ्रेंसिंग में पहुंचे ही नहीं। दरअसल, इनमें से कुछ के मोबाइल नंबर गलत निकले, जबकि कई ने कोई न कोई कारण बताकर आने में असहमति जताई।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अपने स्तर से तीन अन्य लाभार्थियों का पता कर उन्हें वीडियो कांफ्रेंसिंग में बुलाया गया। इनके अलावा छह जन औषधि केंद्र संचालक भी इसमें शामिल हुए। मेरठ में कोई सरकारी जन औषधि केंद्र नहीं है, लेकिन सरकारी मान्यता वाले 15 जन औषधि केंद्र हैं। प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में जन औषधि केंद्रों, आयुष्मान योजना, मिशन इंद्रधनुष, ओडीएफ, मुफ्त डायलिसिस सुविधाओं का हाल जाना। साथ ही सस्ता घुटना प्रत्यारोपण और स्टेंट के बारे में जानकारी कर लाभार्थियों से सीधा संवाद किया। जिन जगहों पर सीधा संवाद हुआ, वह हैं लखनऊ, हैदराबाद, उड़ीसा और राजस्थान।
यह वीडियो कांफ्रेंसिंग कलक्ट्रेट स्थित एनआईसी सेंटर में सुबह साढ़े नौ से साढ़े दस बजे तक (एक घंटा) हुई। इस दौरान सांसद राजेंद्र अग्रवाल, डीएम अनिल ढींगरा और सीएमओ डॉ. राजकुमार मौजूद रहे। इसके अलावा कलक्ट्रेट परिसर में ही जनता के लिए स्क्रीन लगवाई गई थी, ताकि वह प्रधानमंत्री के सीधे संवाद कार्यक्रम को देख सकें। इसमें काफी संख्या में महिलाएं पहुंची।
पहले से पता था नहीं होंगा सीधा संवाद
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह एक-दो दिन पहले ही साफ हो गया था कि प्रधानमंत्री का सीधा संवाद मेरठ वालों से होगा या नहीं। जिनसे संवाद होना था, उन्हें इंटरेक्टिव (बातचीत) मोड पर रखा गया था, जबकि बाकी को लिसनिंग मोड पर रखा गया था। मेरठ वाले लिसनिंग (सुनना) मोड पर थे।
सरकार ने किया था सस्ता इलाज
स्टेंट के दाम पहले 80 हजार से एक लाख रुपये तक थे। बेयर मेटल स्टेंट की कीमत 7660 है, वहीं ड्रग इल्यूटिंग एवं बायोडिग्रेडेबल स्टेंट कीमत अब 27 हजार 890 रुपये हैं। इसी तरह घुटना प्रत्यारोपण की कीमत भी काफी घटा दी गई है। पहले घुटना प्रत्यारोपण में करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च आते थे, अब इसे घटाकर 55 हजार रुपये कर दिया गया है।