कार्यशाला में पशुपालकों को दी जानकारी
परीक्षितगढ़ । विकास खंड परीक्षितगढ़ सभागार में किसान कल्याण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें नरेंद्रपाल सिंह सहायक विकास अधिकारी कृषि ने विभाग द्वारा देय सुविधाओं की विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिक डॉ. नेमीचंद, डॉ. सुरेश मलिक, डॉ. हयात सैफी, अजय कुमार, धीरजपाल सिंह, बलवान सिंह, हरप्रसाद, सोहनपाल, लीलापत शर्मा, अजीत सिंह आदि ने किसानों को कृषि संबंधित व पशुपालकों को जानकारी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकेश प्रजापति, ब्लॉक प्रमुख केपी खुंटी ने किसानों को सम्मानित करते हुए केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। सौरभ वर्मा, राजीव वर्मा, पवन राघव, सुंदरपाल, प्रताप सिंह, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
गरीबों का फ्रिज बनें मिट्टी के बर्तन
या
आधुनिकता की चकाचौंध में अपनी अस्तित्व खोज रहे मिट्टी के बर्तन
परीक्षितगढ़। आधुनिकता की चमक-धमक में अपना अस्तित्व खो चुके मिट्टी के पात्रों का जितना व्याख्यान किया जाए कम है। गरीबों के फ्रिज बने मिट्टी के बर्तन उनके गले को ठंडक पहुंचाने के लिए काफी है।
प्राचीनकाल से पीने के पानी से लेकर खाना बनाने तक लिए मिट्टी के पात्रों को अपना एक अलग ही महत्व होता था। लेकिन बदलते समय और दुनिया की चकाचौंध में मिट्टी के पात्रों की जगह पीतल, तांबा, स्टील और अब लोहे के पात्रों ने लेनी शुरू कर दी है। लोगों की माने तो ये पात्र लोगों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ कर कई खतरनाक बीमारियों को भी जन्म देते हैं। गर्मी के मौसम की बात करें तो फ्रिज लोगों को ठंडा पानी तो दे देता है, लेकिन शरीर में कई तरह के रोग भी पैदा कर देता है। गर्मी के मौसम में बिजली कटौती के चलते ठंडे पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए भी मिट्टी से निर्मित पात्रों की बजारों में अच्छी खासी मांग है। सस्ता और सुलभ साधन उपलब्ध होने के चलते गरीब भी सुराही, मटके और घड़े व अन्य पात्र आसानी से खरीद सकते हैं।
सिंधू घाटी से जुड़ा मिट्टी के पात्रों का इतिहास-आधुनिक युग में अपनी पहचान को बचाने के लिए जुझ रहे है। उस युग में लोग खाना बनाने में मिट्टी के पात्रों का प्रयोग करते थे। वहीं प्राकृतिक चिकित्सा में भी मिट्टी के पात्रों का इस्तेमाल किया जाता था।
मिट्टी के पात्रों में होती है रोगों से लड़ने की क्षमता
विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। भोजन और पानी को मिट्टी के पात्रों में रखने से उसमें मिट्टी के गुण आ जाते हैं। जिसके चलते मिट्टी के बर्तनों में रखा भोजन और पानी व्यक्ति को स्वास्थ्य रखने में अहम भूमिका निभाता है।
गर्भवती को दी जाती है मटके का पानी पीने की सलाह
मटके या सुराही के पानी से सौंधापन होने के चलते आज चिकित्सक भी गर्भवती को फ्रिज की जगह मिट्टी के पात्र में रखे पानी पीने की सलाह देते हैं। मिट्टी के पात्र का पानी सेहत के हिसाब सेे ठंडा होने के साथ ही अपने अंदर सौंधापन भी बनाए रखता है। जिसके चलते यह पानी पीने में भी अच्छा लगता है। साथ ही कब्ज, गला खराब आदि रोगों से भी बचाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
मिट्टी के पात्रों में रखा पानी खाना आदि को ढक्कर रखना चाहिए
साथ ही मिट्टी के पात्रों को अंदर से साफ करना चाहिए।
सुराही, मटके आदि में रखे पानी को प्रतिदिन बदलना चाहिए
लंबे समय तक पानी रखने से इनके छिद्र बंद हो जाते है।