कस्बा बहसूमा स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में कई दिन से पूरा स्टाफ नहीं है। वे प्रदेश सरकार से लाखों रुपये पगार पाकर भी चूना लगाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। जनता की शिकायत के पश्चात दो-चार दिन स्टाफ आ जाता है। इसके पश्चात फिर पुराने ढर्रे पर लौट जाते हैं।
कस्बे के आयुर्वेदिक अस्पताल में लगभग ग्यारह वर्षों से चार बेड हैं। इस कमरे में मेज के ऊपर चार बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल का बोर्ड लगा है। हालांकि उसमें बेड उपलब्ध नहीं हैं। चार बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल नगर पंचायत के रहमोकरम पर नगर पंचायत के एक छोटे से कमरे में सिमटकर रह गया है। जैसे-तैसे रोगी नगर पंचायत पहुंच भी जाए तो उन्हें अस्पताल कहीं नजर नहीं आएगा। क्योंकि अस्पताल के कमरे के बाहर बोर्ड आदि नहीं लगा रखा है। यदि मिल भी गया तो अस्पताल में कोई कर्मचारी नहीं मिलेगा। यहां स्वीपर और वार्ड ब्वाय अवश्य दिखाई देते हैं परंतु वे भी काम से इतर मशगूल दिखाई देते हैं। यदि अस्पताल प्रभारी एवं फार्मेसिस्ट के कभी कभार दर्शन हो जाए तो बड़ी बात है। नगर पंचायत सफाईकर्मियों के मुताबिक यहां पूरे दिन में बमुश्किल से 5-7 मरीज पहुंचते हैं। कमरे में कुछ दवा एवं एक अलमारी नजर आती है। कस्बा निवासी गुलाब, आफताब अल्वी, रामवती, वीरो एवं शहनाज आदि ने बताया कि अस्पताल में जुकाम, खांसी एवं पेट दर्द तक की सामान्य दवा भी नहीं मिलती है। वहीं, अस्पताल प्रभारी डॉ. अतुल कुमार ने फोन पर बताया कि अस्पताल में जरूरत की समस्त दवा उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि वे आज अवकाश पर हैं। यहां चिकित्सा प्रभारी डॉ. अतुल कुमार, फार्मेसिस्ट हनुमान प्रसाद मिश्रा, वार्ड ब्वाय अशोक कुमार व स्वीपर रामचरण की तैनाती है। इस संबंध में डीओ सुरेंद्र कुमार पंवार का कहना है कि चिकित्सा प्रभारी की अनुपस्थिति की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। चार बेड के अस्पताल के लिए चिकित्सा प्रभारी को जमीन तलाशने के लिए कहा गया है। साथ ही रोगियों की संख्या बढ़ाने के लिए 8 किलोमीटर की परिधि में कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य बातें
नगर पंचायत की इमारत में एक कमरे में सिमटा है आयुर्वेदिक अस्ताल
स्टाफ के नदारद रहने और बुनियादी सुविधाओं का टोटा बन रहा परेशानी