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प संचलन निकला।

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हस्तिनापुर।
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कस्बा एवं क्षेत्र में हिंदू नववर्ष पर सरस्वती शिशु मंदिर से बड़ी संख्या में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं विहिप कार्यकर्ताओं ने कस्बे में पथ संचलन किया। वे कस्बे के अधिकतर मोहल्लों से होते हुए देर शाम उक्त स्कूल पहुंचकर समापन हुआ।
कार्यक्रम की शुरूआत केशव बलिराम हेडगेवार एवं माधवराव सदाशिवराव गोवलकर के चित्रों पर माल्यार्पण करके की गई। हिंदू नववर्ष प्रतिपदा कार्यक्रम में मुख्य वक्ता परिषद के सहप्रांत प्रचार प्रमुख सुरेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा भारतीय हिंदू नववर्ष पूरे भारत के लिए अच्छा है। इसका चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुभारंभ होगा। इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसलिए इस दिन को सृष्टि का जन्मदिवस भी माना जाता है। इसी दिन भगवान राम एवं युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था एवं विक्रमी संवत प्रारंभ होता है। महाराजा विक्रमादित्य का शासन चीन, पारस एवं अरब देशों तक फैला हुआ था। यह हमारा नववर्ष नवरात्रि पर शक्ति पूजा से प्रारंभ होगा। यह इस बात का प्रतीक है कि अच्छे गुणों को दुनिया तभी मानती है जब हम शक्तिशाली होंगे। पथ संचालन सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभ होकर पूरे कस्बे में निकाला गया। कार्यक्रम में दर्शन भारद्वाज, सोमनाथ पपनेजा, गौरव गुर्जर, सतपाल भाटी, प्रेमचंद शर्मा, नितिन, सुजीत चौधरी, दिलावर सिंह, ठाकुर अमनपाल, राजीव चौधरी, मुकेश ठाकुर, रमेश ग्रोवर, अनुज शर्मा, बालमुकंद बत्रा, ब्रजपाल, गोपाल शर्मा, अनिल त्यागी आदि रहे।
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भक्तामर सभी कष्टों का हरण करने वाला विधान
हस्तिनापुर।
विश्व की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के आज 46वें दिन सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
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सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य हिमांशु जैन, स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का नरेंद्र जैन, शांतिधारा करने का राजबहादुर जैन, नमन जैन को प्राप्त हुआ। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी एवं भावना दीदी ने मंगल भावना से शांतिधारा का उच्चारण किया। तदोपरांत देव, शास्त्र, गुरु पूजन, आदिनाथ भगवान के पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें विधान कराने वाले सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए। आज 388 परिवारों की ओर से विधान हुआ। जिसमें मुख्य रूप से मंजू जैन, नरेन्द्र जैन, तनु, गर्वित, किंशुक, ईशा, निशा, संतोष, ब्राह्मी देवी जैन आदि शामिल हुए। भक्तामर पाठ का शुभारंभ रंजीता जैन, सीमा जैन ने संस्कृत भाषा में किया। इसी बीच अनेक प्रांतों से पधारे हुए यात्री भाई एवं आनंद जैन, जयकुमार, अजय, तरुण, संयम, नेहा, एकता, नरेंद्र, सुशील जैन ने पाठ का वाचन किया। इसके बाद रेखा जैन ने भजन प्रस्तुत किया। समस्त स्थानीय जैन समाज, बड़ा मंदिर एवं गुरुकुल समस्त स्टाफ एवं बच्चों ने भी सभी कार्यक्रमों में उपस्थिति दर्ज कराई। परम पूज्य गुरुवर ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि एक भक्त जब अम्बर छू लेता है तो वह भक्तामर हो जाता है। भक्तामर स्रोत हमारे सभी दुख, पीड़ा एवं कष्टों को हरने वाला है। आज के विधान का विसर्जन कुसुमलता जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन डॉ. एस.के. जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्जवलन एकता जैनने किया। चैाबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्जवलन विनोद जैन ने किया। प्रश्नमंच विजेताओं को विपिन जैन ने पुरस्कार प्रदान किए। यहां मुकेश जैन, प्रेम, सुभाष, मनोज, राजीव जैन आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के अध्यक्ष अनिल कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन सर्राफ, विधान संयोजक मोतीलाल जैन लंदन, शिखरचंद, विजय कुमार, प्रद्युमन कुमार जैन का विशेष सहयोग रहा।
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