किसानों ने बेशक अधिक गन्ना उत्पादन कर रिकार्ड कायम किया है और चीनी रिकवरी भी अधिक हुई है। इसके बावजूद किसानों का गन्ना भुगतान नहीं हो पा रहा है।
नंगलामल शुगर मिल इस क्षेत्र में गन्ना पेराई में अग्रणी चल रही है। इस क्षेत्र में माछरा, पसवाड़ा, भटीपुरा, मेघराजपुर, नंगलामल, शोल्दा, जिसोरा, अजराड़ा, लोटी, रछौती, जिसोरी, रजपुरा, अतराड़ा, नंगला कबूलपुर, मऊखास, समयपुर, भगवानपुर चट्टावन, मुरलीपुर, अमरपुर, पचगांव, खेड़की, गांवड़ी, गोकुलपुर, आलमपुर, मुंडाली, हसनपुर कलां, रहदरा, खंद्रावली, सिंहपुर, आदि गांवों म़ें गन्ने की बहुत अच्छी पैदावार हुई है। किसान प्रमोद त्यागी, इरफान राधना, मुकेश प्रधान, मनोज मलिक, चंद्रपाल मलिक पसवाड़ा आदि ने बताया कि अधिक गन्ना उत्पादन होने तथा रिकवरी भी गन्ना की अधिक होने के बाद भी 15 दिन में गन्ना भुगतान कराने का सरकारी दावा नाकाम साबित हो रहा है। गन्ने के रिकार्ड उत्पादन के मद्देनजर सरकार ने 15 अक्तूबर से शुगर मिलों का पेराई सत्र शुरू कर दिया था। अन्य पेराई सत्रों की तुलना में इस बार करीब एक माह पहले गन्ना खरीद शुरू हुई, लेकिन अब भी करीब 35 प्रतिशत गन्ना खेेेतों में खड़ा है। चीनी मिलों ने कम इंडेंट जारी कर कम गन्ना खरीदा है। इसकी वजह से ही किसानों को परेशानी हो रही है।
अधिक पैदावार वाली प्रजाति से किसान बेहाल
शुगर मिल ने कम रिकवरी वाली गन्ने की प्रजातियों को रिजेक्ट कर रखा है। अब अधिक रिकवरी वाली प्रजाति सीओजे 238 गन्ना को पूरी तरह मिल एवं किसानों ने अपना लिया है।
कम पर्ची मिलने से परेशान कोल्हू पर डाल रहेे हैं गन्ना
खेत खाली करने और अन्य फसलों की बुवाई को लेकर चिंतित किसान पावर कोल्हू पर 200 से 220 रुपये प्रति कुंतल गन्ना बेचने को किसान मजबूर है। बड़ी मात्रा में कोल्हू पर गन्ना आपूर्ति से किसान को अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ के सचिव रामनरेश शर्मा ने बताया कि जब तक खेतों में गन्ना खड़ा है चीनी मिल बंद नहीं होगी पूरा गन्ना पेराई करके ही मिल अपना पेराई सत्र बंद करेगी।