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मनुष्य कर्मों और शरीर के कारण दुखी है : भावभूषण

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मनुष्य कर्मों और शरीर के कारण दुखी है : भावभूषण
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मवाना। हस्तिनापुर के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य त्रिमूर्ति जिनालय में 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान बड़ी ही भक्ति व श्रद्धा के साथ चल रहा है।
विधान के चौथे दिन शुक्रवार को शांतिधारा करने का सौभाग्य राजेन्द्र कुमार जैन तथा शांतिधारा में सहयोग विकास जैन ने किया। मुनिश्री भाव भूषण महाराज श्री ने मंगल प्रवचन देते हुए जिनेंद्र भगवान की भक्ति की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि हे भगवान! तुम्हारी और हमारी आत्माएं गुण समान हैैं हम और उनमें कोई भेद है तो बस इतना है कि वे कर्मों से रहित हैं और हम कर्मों से सहित हैं। वे बेरागी हैं और हम रागी हैं। आप संसारिक दुखों से रहित हैं और हम संसार के दुख उठा रहे हैं। आप शरीर से संबंध छूटकर परमात्मा बन गए हैं. हम आज भी कर्मों और शरीर के कारण संसार के दुखों से दुखी हैं। हे जिनेंद्र भगवन, आपकी स्तुति एवं पूजन करके हम सबको आत्म बोध जागृत हो और हम भी आप जैसे आलौकिक परमार्थिक सुख को प्राप्त करें।
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संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की परम शिष्या ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी के दिशा निर्देशन के साथ-साथ मंगलमय प्रवचनों का भी सभी को लाभ प्राप्त हो रहा है। इस अनुष्ठान को युवा विद्वान, विधानचार्य पं. आशीष जैन शास्त्री आगमोक्त विधि-विधानुसार संपन्न करा रहे हैं। 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान के चौथे दिन 75 परिवारों ने भाग लिया। 40 दिवसीय विधान में मोतीलाल जैन, प्रवीण जैन, मनोज, विजय कुमार, राजीव जैन, प्रेमचंद, क़ांता जैन, प्रद्युम्न आदि श्रद्धालुगण द्वारा पाठ का आयोजन किया गया। क्षेत्र के मंत्री एवं विधान संयोजक प्रद्युमन जैन ने सम्यक जैन, निकुंज जैन आदि एवं विधान में उपस्थित सभी बाहर से पधारे श्रद्धालुओं का मंगल तिलक माल्यार्पण कर स्वागत किया। सायंकालीन कार्यक्रम में आरती के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसके पुरस्कार शांति देवी जैन, सुशील कुमार जैन द्वारा प्रदत्त किए।
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