होली पर हुआ था मिलावट का खेल, 41 में 17 सैंपल फेल
चांदी के वर्क की जगह बर्फी में मिला एल्युमिनियम, अनारदाना व हल्दी में खतरनाक रंग
दूध से फैट गायब, सिंथेटिक रंगों का भी मिला प्रयोग, एफएसडीए ने लखनऊ भेजे थे सैंपल
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
एफएसडीए की खाद्य सुरक्षा प्रशासन टीम ने होली पर जिन खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए थे, उनमें से 41 सैंपलों की रिपोर्ट आ गई है। इनमें 17 सैंपल फेल निकले हैं। जांच के दौरान बर्फी में चांदी की जगह एल्युमिनियम का वर्क मिला है। अनारदाना और हल्दी में मेटानिल येलो नामक खतरनाक रंग की मिलावट निकली है। तीन सैंपल अनसेफ श्रेणी में हैं, जबकि 14 मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें सिंथेटिक कलर, मिठाई को चमकाने के लिए ज्यादा मात्रा में फूड कलर निकला है। दूध में पानी मिलाया गया था। मानक के अनुसार फैट नहीं पाया गया। एफएसडीए ने यह सैंपल जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजे थे।
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आजीवन कारावास तक का प्रावधान
एफएसडीए की अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए गए हैं, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलता है। इसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा के साथ ही तीन लाख रुपये जुर्माने तक का प्रावधान है।
मिलावट किडनी को पहुंचाती है नुकसान
फिजीशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि रासायनिक रंगों, एल्युमिनियम आदि की मिलावट से गंभीर किस्म के रोग हो सकते हैं। सबसे ज्यादा किडनी को नुकसान पहुंचता है। पेट संबंधी कई तरह के रोग हो सकते हैं। रंगों की मिलावट और अखाद्य पदार्थों से बनी मिठाइयां स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
पहले भी 22 सैंपल हुए थे फेल
दिवाली पर जो खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए थे, उनमें से 41 सैंपलों की रिपोर्ट आई थी। 22 सैंपल फेल निकले थे। इनमें चमचम, बर्फी और बंगाली मिठाई में खतरनाक रंगों की मिलावट निकली थी। खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन मिलावट रुक नहीं रही है।
मिलावट करने वालों के नाम नहीं होंगे सार्वजनिक
अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि विभाग को निर्देश मिले हैं कि जब तक मामलों में कोर्ट कोई फैसला नहीं देता है, तब तक ऐसे लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि दरअसल, रिपोर्ट आने के बाद इन लोगों को एक माह तक अपील करने का हक है। अभी तक रिपोर्ट आने के बाद मिलावट करने वालों का नाम सार्वजनिक कर दिया जाता था।
आकर्षित करने के लिए मिलाते हैं रंग
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल गंगवार ने बताया कि खाद्य पदार्थों में खतरनाक रंगों की मिलावट इसलिए की जाती है, ताकि वह चमकदार और रंगीन लगें और लोग उन्हें खरीदने केलिए आकर्षित हों।