रोडवेज अड्डे पर लागू हो सकता है हवाई अड्डे का फार्मूला
05 हजार रुपये मीटर की तर्ज पर किसानों से जमीन खरीदी प्रशासन ने
01 रुपया मीटर की दर पर लीज पर दी गई है जमीन हवाई अड्डे के लिए एएआई को
- याची लोकेश खुराना हाईकोर्ट में दाखिल करेेंगे हवाई अड्डे का लीज लेटर
- 12 जुलाई को है हाईकोर्ट में सुनवाई
- हाईकोर्ट ने किया रोडवेज और एमडीए अधिकारियों को तलब
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। यदि वास्तव में सरकारी विभागों की मंशा हो तो रोडवेज बस अड्डा शहर से बाहर हो सकता है। हवाई अड्डे की जमीन जिस तरह से एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नाम एक रुपया प्रति वर्ग मीटर में दी गई है, उसी तरह शहर से बाहर रोडवेज बस अड्डे के लिए भी दी जा सकती है। इस बाबत याची सभी दस्तावेज हाईकोर्ट में पेश करने जा रहे हैं।
मेरठ शहर में बीचोबीच स्थित रोडवेज बस अड्डे जी का जंजाल बने हैं। पूरा दिन शहर जाम से जूझता है और इसका सबसे बड़ा कारण है यहां के बस अड्डे। भैसाली अड्डे के कारण दिल्ली रोड पर सारा दिन जाम रहता है। यही हाल गढ़ रोड स्थित सोहराब गेट बस अड्डे का भी है। साथ ही इन बसों के कारण शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। एनजीटी भी इस मामले पर गंभीरता दिखा चुका है।
अब हाईकोर्ट ने किया है तलब
इस मामले में समाजसेवी लोकेश खुराना ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है जिस पर हाईकोर्ट ने 12 जुलाई को रोडवेज और एमडीए अधिकारियों से जवाब मांगा है। दरअसल, एमडीए ने मेरठ महायोजना 2021 में रोडवेज बस अड्डों के लिए जमीन प्रस्तावित की थी। श्रद्धापुरी मेें सेटेलाइट बस अड्डे के लिए जमीन थी और लोहिया नगर में सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए अभी भी जमीन है। एमडीए अधिकारियों का कहना कि रोडवेज ने जगह ली ही नहीं तो सेटेलाइट बस अड्डे की जगह का लैंड यूज बदल दिया गया और वहां प्लॉट काट दिए गए। अब लड़ाई यही है। रोडवेज अधिकारी कह रहे हैं कि एमडीए जमीन नहीं दे रहा और एमडीए अधिकारियों का कहना है कि रोडवेज अधिकारी शहर से बाहर जाने को ही तैयार नहीं है। दूसरा अहम यह है कि एमडीए मुफ्त में जमीन देने को कतई तैयार नहीं है।
इस तरह हो सकता है समाधान
याची लोेकेश खुराना हाईकोर्ट में मेरठ हवाई अड्डे का वह लीज पेपर जमा करने जा रहे हैं जिसमें सरकार ने एएआई को एक रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर जमीन दी है। हालांकि किसानों से इस जमीन का अधिग्रहण किया गया है और उन्हें पांच हजार वर्ग मीटर से ज्यादा की दर पर मुआवजा दिया गया है। याची का कहना है कि इसी तरह से सरकार भले ही एमडीए को इस जमीन का पैसा दे या न दे, पर रोडवेज को एक रुपया प्रति वर्ग मीटर पर जमीन दी जा सकती है। अहम बिंदू यह भी है कि जिस जमीन पर रोडवेज अड्डा है वह बेशकीमती है और इस पर तहसील तथा अलग अलग विभागों के स्वामित्व का दावा है। इसलिए यदि रोडवेज को जमीन एक रुपये की लीज पर दी गई तो वर्तमान जमीन का क्या होगा और इस पर किसका स्वामित्व रहेगा यह भी तय करना होगा।
इन विभागों को हाईकोर्ट में बनाया है पार्टी
1. प्रमुख सचिव परिवहन
2. निदेशक यूपीएसआरटीसी
3. आरएम रोडवेज मेरठ रीजन
4. वीसी एमडीए
5. डीएम मेरठ
रोडवेज अड्डे को क्यों नहीं
मैं हाईकोर्ट के सामने हवाई अड्डे का लीज पत्र पेश कर रहा हूं। जब हवाई अड्डे को एक रुपये की दर पर जमीन दी जा सकती है तो रोडवेज अड्डे को क्यों नहीं। -लोेकेश खुराना, याचिकाकर्ता