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आईआईटी रुड़की के इंजीनियर जानेंगे सड़कों का सच

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मेरठ। शहर की सड़कों और नालों के निर्माण कार्यों का सच अब आईआईटी रुड़की के इंजीनियर जानेंगे। शासन के निर्देश पर नगर निगम प्रशासन ने खासकर 14वें वित्त आयोग और अवस्थापना के खजाने से बनी सड़कों को निशाने पर लिया है।
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प्रदेश सरकार भले ही सड़कों की उम्र पांच साल निर्धारित कर चुकी हो। लेकिन सच्चाई यह है कि शहर की सड़कें पिछले दिनों 24 घंटे की बारिश भी नहीं झेल पाईं। जिसके कारण अधिकांश सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गयी। सड़क बनाने में इस्तेमाल की गयी घटिया सामग्री, निगम अधिकारियों द्वारा निगरानी न किया जाना इसका मुख्य कारण है। सड़कों के भुगतान के लिए ठेकेदारों द्वारा नई दिल्ली लैब की रिपोर्ट भी लगायी गयी है। लैब की रिपोर्ट और सड़कों में लगायी गयी निर्माण सामग्री की पोल खोलने के लिए ही नगर निगम प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है।
अवस्थापना और टीएफसी
अवस्थापना निधि और 14वें वित्त आयोग के खजाने से महानगर में करीब 45 करोड़ के विकास कार्य कराए गए हैं। इनमें अवस्थापना निधि से सड़कों का जाल बिछाया गया। इनमें अधिकतर सड़कें डैंस की हैं। कई-कई करोड़ रुपये में एक-एक सड़क का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार 14वें वित्त आयोग के खजाने से नालों का निर्माण किया गया है, वह भी बड़े नालों का।
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शासन के निर्देश पहुंचे
अवस्थापना निधि और 14वें वित्त आयोग का बड़ा खजाना शहर के विकास पर खर्च होता है। सड़क और नाला बनाने के बाद ठेकेदार पेमेंट लेने के लिए नई दिल्ली और गाजियाबाद की एक लैब की रिपोर्ट लगाते हैं। कई बार इस रिपोर्ट पर उंगली भी उठती रही हैं। उसके बाद भी पर्दा डलता रहा। निगम के अधिकारियों ने एक बार भी अपनी जिम्मेदारी का परिचय नहीं दिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि शहर की सड़कें बनते ही टूट जाती हैं। उनको गड्ढा मुक्त करने के नाम पर भी मोटा खजाना खर्च होता है। धन की बंदरबांट और कमीशन के खेल में कोई कार्रवाई नहीं होती।
निगम प्रशासन को भी करानी होती है जांच
नियमानुसार किसी भी सड़क और नाला निर्माण का कार्य निगम अधिकारियों की निगरानी में होना चाहिए। कम से कम सुपरवाइजर को अपने सामने निर्माण सामग्री बनवानी चाहिए। ताकि घटिया सामग्री का इस्तेमाल होने पर रोक लग सके। लेकिन ऐसा नहीं होता है। कमीशन के खेल में सभी की आंखों पर पर्दा डाल जाता है।
चीफ इंजीनियर को दिए निर्देश
वर्ष 2017-18 और 2018-19 में अवस्थापना विकास निधि और 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों की जांच आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों से कराने के लिए चीफ इंजीनियर को निर्देश दिए हैं। घटिया निर्माण सामग्री मिलने पर भुगतान रोका जाएगा। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
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खास बातें:
नगर निगम
14वें वित्त आयोग और अवस्थापना के खजाने से बनी सड़कें होंगी टारगेट पर
45 करोड़ से बनायी गयी हैं शहर में अवस्थापना निधि से सड़क और नाले
- कई सड़कों की गुणवत्ता पर उठ रहे हैं सवाल, गड्ढों में हुई तब्दील
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