पत्थर फेंकने के लिए कारीगरों पर भी बनाया दबाव
सहारनपुर/बड़ौत/अमीनगर सराय (बागपत)। वेस्ट यूपी के युवाओं के कश्मीर में सेना पर पत्थरबाजी में शामिल होने का मामला सामने आने के बाद पुलिस सक्रिय हो गई है। सहारनपुर और बागपत पुलिस ने कश्मीर से लौटे युवकों से पूछताछ शुरू कर दी है। इन्होंने स्वयं के पत्थरबाजी में शामिल होने से इंकार किया है, लेकिन पत्थरबाजी के लिए भेजे जाने की बात कही है। इससे इतना तो साफ हो ही रहा है कि वहां दूसरे राज्यों के युवकों को भी पत्थरबाजों के साथ भेजा जा रहा था।
पुलिस कारीगरों को कश्मीर ले जाने वाले युवकों की तलाश कर रही है। पिलाना क्षेत्र से एक युवक को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। बड़ौत निवासी नसीम, बालैनी थाना क्षेत्र के डौलचा का शमीम सिलाई के कारीगर हैं। कई माह पहले ये सहारनपुर के युवकों के साथ पुलवामा के लस्सीपुरा स्थित कंपनी मेें सिलाई की नौकरी करने गए थे। नसीम का कहना था कि लस्सीपुरा में कुछ लोगों ने सेना के ऊपर पत्थर फेंकने का दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने पत्थर नहीं फेंके और संबंधित थाने में मामले की जानकारी दी। फैक्ट्री मालिक को भी प्रकरण से अवगत कराया और किसी तरह वहां से भाग निकले। बड़ौत पहुंचकर पुलिस को उन्हें कश्मीर ले जाने वाले युवकों के नाम बताए हैं। एक युवक लोनी और दूसरा सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया। पुलिस ने इन युवकों की तलाश कर रही है।
सीओ बड़ौत रामानंद कुशवाहा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पत्थरबाजी करने जैसा मामला नहीं पाया गया। युवक ने गलत सूचना दी है। इस मामले मेें अन्य जो लोग कश्मीर गए थे, उनसे भी जानकारी ली जाएगी। पुलिस ने उन युवकों की तलाश कर रही जो क्षेत्र के कारीगरों को लोगों को कश्मीर लेकर गए थे, ताकि सही स्थिति स्पष्ट हो सके। पिलाना से एक युवक से पूछताछ की, लेकिन लेेकिन कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं मिल सकी है। एसपी जयप्रकाश का कहना है कि युवकों ने जो बयान दिया था, वह गलत था। मजदूरी को लेकर विवाद में आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस जांच कर रही है।
सहारनपुर के युवकों को ले गया था बड़ौत का ठेकेदार
सहारनपुर। कश्मीर में पत्थरबाजी करने मामले में जिन संदिग्ध युवकों के नाम सामने आए है, उनमें से नकुड़ और गंगोह के तीन युवकों को लेकर सीओ एलआईयू सुधीर तोमर मुख्यालय पहुंचे। तीनों के बयान भी रिकार्ड किए गए हैं। इन युवकों ने पुलिस को बताया कि ठेकेदार उन्हें काम दिलाने के बहाने कश्मीर ले गया था। सेना के सर्च आपरेशन के दौरान ठेकेदार उन्हें आतंकित कर उन्हें भी पत्थरबाजों के साथ भेजता था, मगर उन्होंने किसी तरह की पत्थरबाजी नहीं की है। एसएसपी बबलू कुमार ने माना है कि इनसे पूछताछ में पत्थरबाजी की नहीं बल्कि उकसाने की पुष्टि हुई है, अभी जांच की जा रही है।
जिन तीन युवकों से पूछताछ की गई, उनमें दो पंकज और बबलू गांव जुडी के रहने वाले हैं। पंकज के घरवालों ने बताया कि पंकज और बबलू छह दिन पहले ही गांव में आए है। उनके साथ वहां क्या घटना हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। बबलू के पिता नाथीराम ने बताया कि बबलू पर पिछले दिनों कर्ज हो गया था, वह उसे उतारने के लिए बाहर काम करने की सोच रहा था। उसे बड़ौत का एक ठेकेदार ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा में एक सिलाई फैक्ट्री में 20 हजार रुपये प्रतिमाह काम दिलाने की बात कही थी। पंकज और बबलू उसकी बातों में आ गए। तीन माह पहले वह वहां गए थे। बबलू घर आया तो उसने सिर्फ यह बताया है कि ही बताया कि वहां हमसे पत्थरबाजी करने की बात कही थी जिससे हमने इनकार किया था।
पहले भी सामने आया है घाटी
के आतंकियों का वेस्ट यूपी लिंक
मुजफ्फरनगर। पिछले साल भी कश्मीर के आतंकियों का वेस्ट यूपी से लिंक सामने आया था। जुलाई 2017 में अनंतनाग में लश्कर ए तैयबा के आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ के बाद मुस्तफाबाद मुजफ्फरनगर निवासी संदीप शर्मा उर्फ आदिल को गिरफ्तार किया गया था। संदीप वेल्डर की नौकरी करने कश्मीर गया था और धर्म परिवर्तन कर एक मुस्लिम महिला से शादी कर ली थी। वह लश्कर ए तैयबा से जुड़ गया था।