अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में सोमवार को हुई भारी हिंसा का खौफ रोडवेज स्टाफ में मंगलवार को भी रहा। बवाल की चपेट में आई बसों के स्टाफ के अलावा अन्य 20 फीसदी स्टाफ ड्यूटी से नदारद रहा। वहीं 57 बसों के डैमेज होने से रोडवेज का बस बेड़ा कम हो गया। इसके चलते रूटों पर बसों की कमी से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सोमवार को हुए बवाल में उपद्रवियों ने मेरठ रोडवेज रीजन की 55 बसों में तोड़फोड़ की थी और दो बसों को जला दिया था। इसके अलावा जानी क्षेत्र के पांचली खुर्द में नोएडा डिपो की भी दो बसों को जलाया गया था। उपद्रवियों ने बस स्टाफ की भी जमकर पिटाई की थी। खौफ के चलते दर्जनों बसों के चालक व परिचालक बसों को सड़कों पर ही छोड़कर भाग गए थे। मंगलवार को घायल स्टाफ तो ड्यूटी पर नहीं पहुंचा, वहीं बाकी स्टाफ में भी करीब 20 फीसदी कमी आई। स्टाफ की कमी के चलते शत-प्रतिशत बसों को आन रोड नहीं किया जा सका। बस अड्डे से लेकर वर्कशाप तक बसें खड़ी रही।
रूट पर बसों का इंतजार करते रहे यात्री
57 बसों के कम होने से रोडवेज को जहां भारी नुकसान हुआ है। वहीं रूट की बसें कम होने से यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ी है। मंगलवार को बसों के इंतजार में यात्री रूटों पर खड़े रहे। सबसे ज्यादा परेशानी बागपत, बड़ौत, शामली, मुजफ्फरनगर, दिल्ली और हापुड़ आदि रूटों पर हुई।