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सपोलिया नदी

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सहारनपुर समेत अन्य सभी केन्द्रों के ध्यानार्थ
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हिंडन की सहायक सपोलिया नदी की धारा को खोजा
- सेटेलाइट मेपिंग में थी शामिल पर मौकेपर नहीं चल रहा था पता
- शिवालिक फारेस्ट रेंज में हिंडन के समानांतर चलती है
- आठ किमी दूरी तय करती है और मिलती है कालूवाला में आकर

अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
हिंडन के पुनर्जीवन को चल रहे अभियान के तहत रविवार को टीम निर्मल हिंडन के एक हाथ एक बड़ी सफलता हाथ लगी। हिंडन की सहायक नदी सपोलिया को खोजा गया। दरअसल, यह धारा सेटेलाइट मेपिंग में तो थी पर मौके पर इसका पता नहीं चल रहा था। मंडलायुक्त मेरठ डा. प्रभात कुमार के नेतृत्व में निर्मल हिंडन अभियान चलाया जा रहा है। उद्देश्य है कि निर्मल को पूरी तरह से प्रदूषण से मुक्त किया जाए। इस बाबत गांव गांव टीम बनी है। नीर फाउंडेशन के निदेशक रमन कांत त्यागी और टीम के सदस्य रविवार को उस धारा के उद्गम को तलाशने निकले जो सेटेलाइट मेपिंग में थी। रमल के मुताबिक यह एक छोटी सहायक नदी सपोलिया की धारा थी, जिसे ढूंढ लिया गया।

सहारनपुर शिवालिक में ही मिला उद्गम
सपोलिया भी शिवालिक के जंगल में हिंडन की मुख्य धारा की पश्चिमी दिशा से निकलती है। लगभग आठ किमी यह धारा पूरी पहाड़ों में ही अपना सफर तय करते हुए कालूवाला टोंगिया गांव के करीब तीन किलोमीटर ऊपर आकर हिंडन धारा में मिलती है। सपोलिया जैसी कुछ अन्य धाराएं भी हैं, जो कि हिंडन में पानी का स्तर बढ़ाती हैं। सपोलिया घने जंगल के बीच से साफ स्वच्छ जल लेकर आती है और उसको हिंडन में मिला देती है। टेढी मेढी होने के कारण इसका बहने का रास्ता बहुुत संकरा है।
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जैव विविधता की भरमार
सपोलिया के दोनों ओर घना जंगल होने से यहां जैव-विविधता की भरमार है। विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे व पशु-पक्षी भी यहां मिलते हैं। वर्तमान में सपोलिया में जगह-जगह पानी भरा साफ दिख जाता है जबकि बरसात में इसमें बहुत पानी बहकर आता है। वहां बसे वन गुर्जर सपोलिया को हिंडन की बेटी के तौर पर देखते हैं वे इसे तेज-तर्रार नदी बताते हैं। सपोलिया के ऊपर तक जाने का रास्ता बहुत ही खतरनाक है। यहां खड़ी पहाड़िया हैं।

सपोलिया पर होगा काम
सपोलिया धारा की पहचान होने से जहां हिंडन उद्गम की एक ओर प्रमुख धारा पर कार्य करना आसान होगा। किसी भी नदी के उद्गम में इस प्रकार की धाराएं ही नदी को बड़ा रूप देती हैं। सपोलिया को हिंडन के नक्शे में दर्शाने का कार्य भी किया जाएगा। सपोलिया जैसी चार धाराएं ओर भी हैं जिनको कि दिसंबर माह में ही चिन्हित कर लिया जाएगा। इसके बाद हिंडन नदी का एक संपूर्ण नक्शा तैयार हो पाएगा। इस प्रकार की छोटी खोज से हिंडन नदी को पूर्णता में दर्शाना आसान होगा तथा उसके पुनर्जीवन के लिए कार्य करने में भी आसानी होगी।

ये भी होने हैं काम
इस अभियान में कई चरणों में काम होना है। जहां हिंडन कोष की स्थापना हो चुकी है तो वहीं योजनाबद्घ तरीके से अलग अलग चरण तय किए गए हैं। तालाबों का जीर्णोद्घार होना है तो साथ ही हिंडन में विभिन्न माध्यमों से जा रहे प्रदूषण को रोकना है। इस बाबत जिन जिन जिलों से होकर हिंडन गुजर रही है उनके अधिकारियों के साथ लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। औद्योगिक अपशिष्ठ प्रबंधन, सीवरेज ट्रीटमेंट, नगर निकायों के सॉलिड वेस्ट पर कार्य करने, अतिक्रमण हटाने, पौधरोपण करने, हिंडन व उसकी सहायक नदियों के समीप के ग्रामों को ओडीएफ घोषित कराने, रजवाहों को पुनर्जीवित करने, किसानों को आर्गेनिक फार्मिंग करने के लिये प्रेरित करने, नहरों से भी हिंडन में पानी डालने, प्रदूषण के स्तर को कम करने, जागरूकता कार्यक्रम, मास मोबिलाइजेशन, रिसोर्स जनरेशन आदि पर मुख्य रूप से काम होगा।
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वर्जन
हिंडन को निर्मल करने के लिए सभी जगह काम चल रहा है। लोग संकल्प लेकर जिस निष्ठा से काम कर रहे हैं, उससे लगता है कि हमारा यह अभियान जल्द ही पूरा होगा। सपोलिया नदी का उद्गम मिला है। ऐसे ही धाराएं मिलकर नदी को विस्तार देंगी- डा. प्रभात कुमार आयुक्त मेरठ
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