मेरठ। आकाश के माथे पर खिला चांद, सुरों से गुफ्तगू करती शाम का सौंदर्य तब और धवल हो गया जब संतूर, तबला और पखावज पर अंगुलियों की जुगलबंदी थिरक उठी। शनिवार शाम आरजी पीजी कॉलेज के प्रेक्षागृह में मेरठ में जन्मे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध तबला वादक स्वर्गीय उस्ताद हशमत अली खान की स्मृति में संगीत संध्या का आयोजन हुआ। तबला एकेडमी ऑफ अजराड़ा घराना द्वारा आयोजित अजीम शाम का शुभारंभ तबला एकेडमी ऑफ अजराड़ा घराने के सप्तक शर्मा, आशुतोष, हफीज खां, रोमान खां व जरघम अकरम खां ने किया।
मेरठ के मेहमान बनकर पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी ने इस भावपूर्ण शाम के शुभारंभ को आज राग कौशिकरंजिनी को वादन के लिए चुना। अपने प्रिय कश्मीरी रागों से इतर राग कौशिकरंजिनी पर पंडित जी ने संतूर बजाया। अलाप जोड़ के साथ संतूर के 100 तारों पर पंडित भजन जी की अंगुलियां चपलता से थिरकने लगी। सूफियाना घराने के संतूर वादक पंडित भजन जी श्रोताओं को संतूर पर रसों से सराबोर करते हुए पखावज के साथ छंद आधारित जोड़ पर ले गए। पखावज पर ऋषि उपाध्याय ने संगतकारी करते हुए छंद आधारित जोड़ बजाए। संतूर - पखावज की इस जुगलबंदी का सौंदर्य उस्ताद अकरम खां के तबले की संगतकारी से अनुपम हो उठा। पिता स्वर्गीय हशमत अली खान को श्रद्धांजलि अर्पित कतरे हुए मशहूर ताबलिक उस्ताद अकरम खान ने राग किरमानी के साथ तबला बजाया। राग किरमानी में मध्यम ताल पर तबला, संतूर और पखावज की जुगलबंदी हुई। जुगलबंदी में विलंबित, त्रिताल, एकताल में गतें बजाकर श्रोताओं को रसविभोर कर दिया। संगीत संध्या का प्रभावशाली समापन, पंडित भजन सोपोरी और ऋषि उपाध्याय के पखावज की जुगलबंदी से हुआ। संतूर की हर तान के बाद वहां से मुखडे़ को तबले पर पकड़ने का उस्ताद अकरम खान का अंदाज अद्भुत था। अजराड़ा शैली में बजते तबले की अंतिम थाप को पखावज के नाद पर बजाकर ऋषि उपाध्याय ने संगीत का तिलिस्म रच दिया। तीनों सारथी साजों और स्वरों का सुंदर इंद्रधनुष रचते गए। सुर संतूर में दिव्यांश श्रीवास्तव संगत पर रहे।
एडीजी प्रशांत कुमार ने किया शुभारंभ
संगीत संध्या का शुभारंभ एडीजी प्रशांत कुमार, संतूरबाज पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी, अजराड़ा घराने के तबला वादक उस्ताद अकरम खान व उनके भाई ने किया। अजराड़ा परिवार के सदस्यों ने उस्ताद हशमत अली खान का परिचय दिया। संगीत संध्या का आयोजन अनूप सिंघल ने किया। आरजी पीजी कॉलेज की प्राचार्या स्नेह गुप्ता ने सभी का आभार दिया। संचालन डॉ. रेनू जैन व दीपशिखा ने किया। शहर के कला व संगीत प्रेमी मौजूद रहे।