मेरठ। राजनीति कब किस दिशा में मुड़ जाए, कहा नहीं जा सकता। डेढ़ साल पहले जिस अतुल प्रधान ने भाजपा को जिला पंचायत चुनाव में धूल चटायी थी और उसके बाद उसी भाजपाई खेमे के कारण जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भी गंवानी पड़ी। मंगलवार को उसी भाजपा की जीत के सूत्रधार अतुल प्रधान ही बने।
इस उपचुनावी समर में अहम बात ये भी रही कि जैसे ही अतुल प्रधान अपनी पत्नी सीमा प्रधान सहित तीन अन्य जिला पंचायत सदस्यों को वोट दिलाने के लिए लेकर पहुंचे, तो भाजपाई खेमे से उनके पक्ष में जमकर नारेबाजी हुई। दरअसल सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अति करीबियों में शामिल अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान पिछला जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव लड़ी थीं और उनके सामने भाजपा के कुलविंदर सिंह ही थे। सीमा प्रधान वह चुनाव दो वोटों से जीती थीं।
इसके बाद प्रदेश की सत्ता बदली और भाजपा सरकार आयी तो कुलविंदर सिंह ने सीमा प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कवायद शुरू कर दी, जिसमें कामयाबी भी मिली। अविश्वास प्रस्ताव आता देख सीमा प्रधान ने खुद ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में माना जा रहा था कि अतुल प्रधान कुलविंदर सिंह का विरोध करेंगे। लेकिन जातीय दबाव और तमाम समीकरणों को देखते हुए अपने चिर प्रतिद्वंद्वी सरधना विधायक संगीत सोम को झटका देने की योजना बनायी, तो भाजपा खेमे में खुशी की लहर ला दी।
खास बात:
- जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव में सरधना विधायक को झटका देने की योजना बनायी
- वोट डालने पहुंचते ही भाजपाई खेमे में लगे अतुल प्रधान के पक्ष में नारे