मोदीपुरम। वेस्ट यूपी में गेहूं की बुवाई का अनुकूल समय चल रहा है। किसान समय से बुवाई कर अधिक पैदावार ले सकते हैं। किसान गेहूं की बुवाई के समय वैज्ञानिक विधि का इस्तेमाल करें और अधिक लाभ ले सकते है। यह बातें सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डॉ. महेंद्र सिंह ने बताई।
उन्होंने कहा कि समय पर बुवाई करने और उचित मात्रा में उर्वरक से उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। किसान को समय-समय पर मिट्टी की जांच भी अवश्य करानी चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति का पता चलता है। यदि किसान समय से गेहूं की बुवाई करेंगे और सही प्रजाति का चयन करेंगे तो फिर गेहूं की नवीनतम और अधिक उपज देने वाली रोग रहित प्रजातियों से पैदावार भी बढ़ाई जा सकती है। किसान नवीनतम प्रजातियों के माध्यम से 20 से 25 प्रतिशत गेहूं की अधिक पैदावार ले सकते है।
इन प्रजातियों की ऐसे करें बुवाई
अगेती प्रजातियां- पीबीडब्लू 725, पीबीडल्बू 677 ,एचडी 2967, डीबीडब्लू 17, पीबीडब्ल ू550, पीबीडब्लू 292 प्रजाति की नवंबर के प्रथम सप्ताह में बुवाई करें।
मध्य समय- पीबीडब्लू 226, डीबीडब्लू 16, पीबीडब्लू 1105 प्रजाति की बुवाई 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक बुवाई करें।
-विलंब से- पीबीडब्लू 458, पीबीडब्लू 226 प्रजाति की बुवाई दिसंबर में बुवाई करें।
इस तरह करें सिंचाई
गेहूं की फसल की सिंचाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए अच्छी उपज के लि छह बार सिंचाई करे।
- पहली सिंचाई- मुकुट जड़ अवस्था पर बुवाई के 20 से 25 दिन बाद।
- दूसरी सिंचाई- कल्ले बनने के अंतिम अवस्था पर बुवाई के 45 से 45 दिन बाद।
- तीसरी सिंचाई- पौधों में गांठ बनने की अवस्था पर बुवाई के 60 से 65 दिन बाद।
- चौथी सिंचाई- पुष्पा अवस्था पर बुवाई के 80 से 85 दिन बाद।
- पांचवीं बुवाई- दुग्धावस्था पर बुवाई के 100 से 105 दिन बाद।
- छठी सिंचाई-- दाना भरते समय बुवाई के 115 से 120 दिन बाद।
खेत को करें तैयार
वैज्ञानिकों के अनुसार बुवाई से पूर्व खेत की अच्छी तरह तैयारी करनी चाहिए। खेत को दो बार रोटावेटर द्वारा जुताई करके फसल अवशेषों को मिट्टी में मिला दें। इसके बाद दो बार कल्टीवेटर द्वारा खेत की जुताई कर पाटा लगाकर समतल कर लेना चाहिए।