अमर उजाला ब्यूरो
माछरा।
दिल्ली-एनसीआर में छाई धुंध को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के औद्योगिक ईकाइयों को बंद करने के आदेश पर नंगलामल डिस्टलरी बंद हो गयी है। हालांकि नंगलामल शुगर मिल बंद नहीं होगी। इससे मिल प्रबंधन और किसानों ने राहत की सांस ली है। नंगलामल शुगर मिल बंद होने से गेहूं बुवाई पिछड़ जाएगी।
दिल्ली एनसीआर में कई दिनों से छाई जहरीली धुंध से निपटने के लिए एनजीटी द्वारा औद्योगिक इकाईयों को 14 नवंबर तक बंद करने के आदेश से नंगलामल शुगर मिल भी दायरे में आ गयी थी। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण विभाग मेरठ के माध्यम से नोटिस नंगलामल मिल को दिया गया परंतु नंगलामल मिल प्रबंधन द्वारा शुगर मिल बंद नहीं की गई। उसकी चिमनी पूर्व की भांति निरंतर सुलग रही है।
नंगलामल शुगर मिल के उपगन्ना महाप्रबंधक एलडी शर्मा ने बताया कि नोटिस मिलते ही नंगलामल की डिस्टलरी को बंद कर दिया गया। हालांकि डिस्टलरी से किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता है। प्रबंधन ने पहले से ही वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए उपाय कर रखे हैं। उन्होंने बताया कि डिस्टलरी में कार्यरत कर्मचारियों को अन्य काम में लगाया जायेगा। शुगर मिल को आवश्यक वस्तु अधिनियम की श्रेणी में रखा गया है क्योकि चीनी रोजमर्रा में उपयोग की जाने वाली वस्तु है और इसकी आवश्यकता पड़ती रहती है। इसलिए शुगर मिल बंद नहीं होंगी।
उधर, क्षेत्र में माछरा, अमरपुर, रछौती, हसनपुर कलां, खंद्रावली, बड़ागांव, रहदरा, जिसोरा, पसवाड़ा, दबथला, मऊखास, नंगलामल, लोटी आदि गांवों में कोल्हूओं की भरमार है। रछौती, जिसोरी, जिसोरा, नंगलामल आदि गांवों में मावा बनाने के लिए भट्ठियां चल रही हैं। जिसमें यह कोल्हू और मावा बनाने की भट्ठियां लगातार वातावरण को प्रदूषित कर रही हैं। जिससे क्षेत्र में वायु जहरीली होने की आशंका है। इसके बावजूद इन पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है।
क्षेत्र के किसान प्रधान राकेश त्यागी, मुकेश, प्रमोद त्यागी उर्फ लाला, धर्मेश आदि का कहना है कि यदि नंगलामल शुगर मिल बंद हो गयी तो गन्ना किसानों के समक्ष को गेहूं की बुआई के लिए खेत खाली करने एवं चारे की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए अतिरिक्त ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।