खरखौदा। नगर पंचायत अध्यक्ष पद आरक्षित होने के कारण मतदाताओं में चुनाव को लेकर उत्साह कम दिख रहा है। हालांकि दावेदार चुनाव के मद्देनजर गठजोड़ में लगे हैं। वहीं, माहौल को गर्माने के लिए कमर कस रहे हैं।
खरखौदा नगर पंचायत अध्यक्ष पद 49 वर्ष में महज दो बार आरक्षित रहा है। पहली बार 2012 में ओबीसी महिला के लिए तथा इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। जब-जब नगर पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित रहा है। तब-तब लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। एक-एक प्रत्याशी के साथ सैकड़ों समर्थक वोट मांगते, बैठकें और पंचायत करते नजर आते थे। इस बार सीट आरक्षित होने के कारण अध्यक्ष पद के दावेदारों के साथ गिने-चुने समर्थक ही नजर आ रहे हैं। इससे साफ है कि मतदाताओं में अध्यक्ष पद के लिए उत्साह कम बना हुआ है। खरखौदा त्यागी बहुल कस्बा है। अनारक्षित सीट पर लोगों की प्रतिष्ठा दांव पर रहती थी। जिस कारण प्रत्याशी खूब पैसा खर्च कर प्रचार-प्रसार करते थे। इस बार कस्बे में चुनावी माहौल अभी प्रभावी नहीं दिख रहा है। हालांकि दावेदार चुनावी माहौल को गर्माने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। वहीं, सभासद पद के लिए अनारक्षित वार्डों में चुनावी माहौल दिखने लगा है। अध्यक्ष पद के साथ खरखौदा में बारह में से सात वार्ड आरक्षित हैं। यहां महज पांच वार्ड अनारक्षित हैं। खरखौदा में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए बुधवार तक तहसील स्तर से 17 फार्मों की बिक्री हो चुकी है। वहीं, सभासदों पद के लिए अब तक 35 फार्मों की ब्रिकी हुई है। वहीं, राजनीतिक लोग जरूर अपने प्रत्याशियों के लिए प्रयास करते नजर आ रहे हैं। हालांकि किसी भी पार्टी में अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं।