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नगर पंचायत की राजनीति केवल दो वर्गो मे सिमट कर रह गई जनता विकास की बाट जोते रह गई।

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बहसूमा।
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मेरठ-पौड़ी राजमार्ग स्थित कस्बा बहसूमा के मतदाताओं में वर्ग आधारित राजनीति के कुचक्र से बाहर निकलने की छटपटाहट इस बार साफ दिख रही है। वे कस्बे का विकास कराने वाले प्रत्याशी के पक्ष में खड़ा होना चाहते हैं। इसी सोच ने तमाम दावेदारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इसलिए वे मतदाताओं की नब्ज पहचान कर भरपूर विकास कराने के दावे करने लगे हैं।
कस्बे में नगर पंचायत का चुनाव पहली बार 1988 में हुआ था। हालांकि नगर पंचायत का दर्जा 1971 में मिल चुका था। उस समय कस्बे की आबादी 7200 थी। शासन द्वारा 1988 में चुनाव घोषित किए गए। कस्बे में हुए पहले चुनाव में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए किसान वर्ग से चौधरी जयसिंह, व्यापारी वर्ग से वकील चंद जैन एवं मजदूर वर्ग से नरेश जाटव के बीच रोचक मुकाबला हुआ था। जिसमें किसान वर्ग के चौधरी जयसिंह एकतरफा मुस्लिम मत प्राप्त कर विजय हुए थे। 1995 में दूसरे चुनाव में दलित नेता मुस्लिम मतों में सेंधमारी कर राजेश कुमारी चेयरमैन बनने में कामयाब रही। वहीं, तीसरे चुनाव में सामान्य सीट होने पर समाज के सभी वर्गाें की उम्मीदवारी के चलते किसान वर्ग से ब्रह्मपाल राठी 1280 मत प्राप्त कर विजय हुए थे। हालांकि मुस्लिम उम्मीदवार मोहम्मद इदरीश दूसरे स्थान पर रहे थे। इसी कार्यकाल में आपसी मतभेद के चलते पूर्व चेयरमैन के पति नरेश जाटव की सरेशाम गोली मारकर हत्या हो गई थी। इसके फलस्वरूप 2007 में दलित नेता की पत्नी राजेश कुमारी ने मुस्लिम मतों के बलबूते परवीन खटीक पर भारी मतों से विजय प्राप्त की थी। इसके बाद वर्ष 2012 में नगर पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ। चुनाव के दौरान मुस्लिम समुदाय की एक युवती लापता हो गई। इसका आरोप दूसरे वर्ग के युवकों पर लगा। इसके फलस्वरूप राजेश कुमारी ने राजेंद्र तेजयान को हराकर तीसरी बार मुस्लिम मतों के सहारे विजय पताका फहराई। इस बार सामान्य जाति एवं पार्टी सिंबल पर चुनाव होने से नगर पंचायत के चुनाव रोचक होने के आसार हैं।
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निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही मतदाताओं में मंथन को दौर शुरू गया है। इस बार मतदाता विकास की उम्मीद लगाए हैं। सामान्य जाति की सीट होने के चलते सभी वर्गों के उम्मीदवार अपने अरमान पूरे करने को आतुर दिख रहे हैं। सभी वर्गों के मतदाता परिर्वतन के तौर पर नई उम्मीद के साथ नए उम्मीदवार को नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर चुनना चाहते हैं। अध्यक्ष पद के दावेदार सियासी गोटियां बिछाने में मशगूल हैं। इस बार 22 नंवबर को होने वाले चुनाव में 9,999 वोटर मताधिकार का इस्तेमाल करने को तैयार हैं। पिछले चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने वाले मुस्लिम इस बार संख्याबल में सभी पर भारी हैं। इसका पता एक दिसंबर को चल सकेगा कि नगर पंचायत की राजनीति दो वर्गों में ही सिमटती है या दायरा तोड़कर बहार निकलने में कामयाब होती है।
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नो ड्यूज के लिए नगर पंचायत में उमड़ी भीड़
अधिसूचना जारी होने के बाद नगर पंचायत अध्यक्ष एवं सभासद पद के दावेदारों की बुधवार को नगर पंचायत में भीड़ रही।

मुचलका पाबंद किए
नगर पंचायत चुनाव के मद्देनजर पुलिस ने कमर कस ली है। एसओ अजय चौधरी ने बताया कि नगर पंचायत चुनाव के लिए छह मतदेय स्थल एवं 11 बूथ बनाए जाएंगे। वहीं, पुलिस ने अब तक 52 लोगों को मुचलका पाबंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि चुनाव में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसओ ने बताया कि कस्बे में 32 शस्त्र धारक हैं। जिनसे तुरंत शस्त्र जमा कराने के लिए कहा है। अभी 15 लोग ही शस्त्र जमा कर पाए हैं।
मुख्य बातें
नगर पंचायत का चुनाव विकास के मुद्दे पर होने के प्रबल आसार
दावेदार कर रहे कस्बे के चहुंमुखी विकास के वादे
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