मेरठ जनपद के एकमात्र ऐतिहासिक गंगा स्नान मेले का उद्घाटन होने में एक दिन शेष है। हालांकि इसकी तैयारियां कछुए की चाल से चल रही हैं। लगता है हर बार की तरह इस बार भी मेले का उद्घाटन आधी अधूरी तैयारियों के बीच ही होगा। वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर का कहना है कि वे चार दिन पहले गए थे। अफसरों को समय सीमा के भीतर काम करने के निर्देश दिए थे। अब दोबारा जाकर स्थिति का जायजा लेंगे।
मखदूमपुर में गंगा स्नान मेले में तीन-चार दिन पहले से लाखों श्रद्धालु गंगा किनारे डेरा जमा लेते हैं। इसी कारण मेले को लक्खी मेले के नाम से भी जाना जाता है। इस मेले की तैयारियों का जिम्मा पूरी तरह जिला पंचायत पर है। दो दशक से भी अधिक समय से जिला पंचायत इस मेले को लगाती है। हालांकि हर बार बजट तो बढ़ जाता है, लेकिन मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कुछ खास नहीं हो पाता है। इसी कारण मेरठ जनपद का एकमात्र मेला होने के बावजूद अपने स्वरूप को प्राप्त नहीं कर सका है।
मेले का मंगलवार को शुभारंभ होना है। मेला स्थल पर व्यापारियों ने दुकानें लगानी भी शुरू कर दी हैं। दुकानदार मौरना निवासी वीरेंद्र ने बताया कि वह मेले में बीते 15 साल से दुकान लगा रहा है। इस बार भी सोफ्टी की दुकान लेकर आया है। इकवारा निवासी समय सिंह ने बताया कि वह मेले में बीते 11 साल से खिलौनों की दुकान लगाता है। खतौली निवासी श्याम सिंह ने बताया कि वह बच्चों का झूला लेकर आया है। मेले में रात के समय बिजली आदि की व्यवस्था नहीं होने के कारण अंधेरा पसरा है। वहीं, कोतवाली तो बनकर तैयार है, लेकिन अभी तक पुलिसकर्मी नहीं पहुंचे हैं।
वहीं, मेला स्थल पर तैयारियां चल रही हैं। हालांकि इनकी गति बहुत धीमी है। अभी तक घाट पूरी तरह से व्यवस्थित नहीं हो पाया है। यहां पर गंदगी पसरी है। साथ ही जगह-जगह पानी होने से गंगा तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को दिक्कत होगी। खुले में शौच मुक्त की बात कही जा रही थी। हालांकि यहां अभी तक दुकानदारों के लिए शौचालय आदि की व्यवस्था नहीं की गई है। अभी तक स्ट्रीट लाइट आदि की व्यवस्था भी नहीं की गई है। वहीं, न तो अभी वाच टावर बने हैं और न ही महिला घाटों का निर्माण हुआ है। लगता है कि इस बार भी बीते वर्षों की भांति मेले का उद्घाटन आधी-अधूरी तैयारियों के बीच होगा। कछुए गति से हो रही तैयारियों की बाबत जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह का कहना है कि चार दिन पहले वे मेले में गए थे तथा ठेकेदार और अधिकारियों को तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। वे आज शाम को फिर से तैयारियों का जायजा लेंगे।
निकाय चुनाव का पड़ सकता है मेले पर असर
मवाना। इस बार नगर निकाय चुनाव तथा शुगर मिल चालू हो जाने का असर मेले में दिख सकता है। हर बार श्रद्धालु गंगा मेले में चार दिन पहले पहुंच तंबुओं का अस्थायी नगर बसा देते थे। इस बार नगर निकाय चुनाव तथा मवाना शुगर मिल चालू हो जाने का असर मेले पर पड़ सकता है। इनके कारण मेले में श्रद्धालुओं की संख्या कम रह सकती है। चार दिन के बजाय आखिरी दिन कार्तिक पूर्णिमा वाले दिन ही श्रद्धालु धर्मलाभ अर्जित करने पहुंच सकते हैं।
मुख्य बातें
मेला स्थल पर चारों और पसरी है गंदगी
दुकानदारों के लिए अभी तक तैयार नहीं हैं शौचालय
जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्देश के बावजूद तैयारियां कछुआ गति से